Editorial: लोकसभा में बजट सत्र भी हंगामों की भेंट चढ़ा पहले सत्र में बजट पारित हुआ लेकिन विपक्ष के रवैये के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई। यहां तक की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा में अपना उद्बोधन नहीं दे पाये थे। उसी दौरान विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था जिसे मंजूद कर लिया गया था और बजट सत्र के दूसरे भाग में पहले ही दिन इस अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करने की घोषणा कर दी गई थी। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नैतिकता के नाते अध्यक्षीय आसंदी पर बैठना भी बंद कर दिया था।
बजट सत्र के दूसरे भाग में जब पहले दिन लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की बारी आई तो विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करने की जगह मीडिल इस्ट में छिड़ी जंग पर चर्चा कराने की मांग शुरू कर दी और इसे लेकर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया। नतीजतन दूसरे सत्र का पहला दिन हंगामों की भेंट चढ़कर रह गया और इस एक दिन की कार्यवाही पर लगभग 8 करोड़ रूपये व्यर्थ खर्च हो गये। दूसरे दिन जब लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उठकर चलते बने। जबकि वे ही यह आरोप लगाते हैं कि सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता।
राहुल गांधी की जगह कांग्रेस के जिन सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखी वे भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बारे में कम ही बोल पाये। उन्होंने सरकार को ही निशाने पर लिया। विपक्षी सांसद यह भूल गये थे कि यह अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ है या सरकार के खिलाफ यदि उन्हें सरकार के खिलाफ ही अपनी बात रखनी थी तो फिर लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करना चाहिए था। वैसे भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने से उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
सदन में एनडीए का बहुमत है नतीजतन इस अविश्वास प्रस्ताव को गिरना ही था जो आखिरकार ध्वनिमत से गिर ही गया। उल्टे विपक्ष ने इसे पेश करके अपनी छिछालेदर करा ली। अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष के आरोंपो का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बखिया उधेड़ कर रख दी। उन्होंने जो नेता प्रतिपक्ष लोकसभा के भीतर आंख मारता हो प्लांईग किस उछालता हो और प्रधानमंत्री से जबरन गले मिलने जैसी हरकतें करता हो वह सरकार को या लोकसभा अध्यक्ष को यह न सिखाये कि संसद कैसे चलाई जाती है।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष ने हमेशा विपक्ष का सम्मान किया है पिछली लोकसभा में ही जब कांग्रेस के सिर्फ 52 सांसद थे तब भी उन्हें भाजपा से 4 गुना ज्यादा बोलने का समय दिया गया था और इस कार्यकाल में भी कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों को भाजपा से दोगुना ज्यादा समय बोलने के लिए दिया गया है लेकिन वे तो सदन में बोलना ही नहीं चाहते और संसद से बाहर जाकर मीडिया के सामने यह झूठा आरोप लगाते हैं कि उन्हें बोलने ही नहीं दिया जाता।
संसद नियमों के अनुसार चलती है यदि विपक्ष बोलना चाहता है तो उसे नियम प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा। अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि जब सदन में बोलने का मौका आता है तो वे कभी इंग्लैंड में रहते हैं तो कभी जर्मनी में तो कभी और कहीं चले जाते हैं यही नहीं बल्कि उन्होंने तो पूर्व में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भी भाग नहीं लिया था। इसी तरह केन्द्रीय बजट चर्चा के दौरान तथा अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान भी वे गायब रहे हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला।
कुल मिलाकर विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर आ बैल मुझे मार वाली कहावत ही चरितार्थ कर डाली जिससे उसे हासिल तो कुछ भी नहीं हुआ उल्टे उसे अपनी स्थिति हास्यास्पद बना डाली। विपक्ष का यह रवैया हैरान करने वाला है। बेहतर होगा कि संसद के बजट सत्र के शेष समय में वह बेवजह का हंगामा खड़ा करके संसद की कार्यवाही को बाधित करने से परहेज करे और जनहित से जुड़े मुद्दे उठाकर सरकार को घेरने का प्रयास करे जो उसका कत्वर्य भी है।
