War Impact On Industries : जंग से छत्तीसगढ़ के उद्योगों में हाहाकार, प्लास्टिक कारखानों में ‘तालाबंदी’ जैसे हालात

दुनिया के नक्शे पर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच मची खींचतान की आंच अब छत्तीसगढ़ की औद्योगिक (War Impact On Industries) बस्तियों तक पहुंच गई है। राजधानी रायपुर के उरला, सिलतरा और बिलासपुर के सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरने लगा है।

खाड़ी देशों में युद्ध की वजह से पेट्रो-केमिकल्स की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है, जिसका सीधा प्रहार यहां के प्लास्टिक उद्योग पर हुआ है। स्थिति यह है कि जो कारखाने कभी चौबीसों घंटे मशीनों के शोर से गूंजते थे, वहां अब उत्पादन आधा रह गया है।

कच्चे माल की किल्लत और महंगी होती मैन्युफैक्चरिंग

प्लास्टिक उद्योग पूरी तरह से पेट्रो-केमिकल्स पर आधारित है, लेकिन युद्ध की वजह से कच्चे माल की आवक (War Impact On Industries) घट गई है और कीमतें 15 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि आपूर्ति ठप होने से उद्योगों का उत्पादन लगभग 50 फीसदी गिर चुका है।

बड़े कारखानों में अब तीन पालियों की जगह सिर्फ एक या दो शिफ्ट में काम लिया जा रहा है, वहीं छोटे कारखाने बंदी की कगार पर हैं। अगर यह तनाव अगले तीन सप्ताह और खिंचा, तो हालात पूरी तरह बेकाबू हो सकते हैं।

सरकारी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर लगा ब्रेक (War Impact On Industries)

प्लास्टिक सेक्टर में आए इस संकट ने प्रदेश की महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं की सांसें फुला दी हैं। केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाले ‘जल जीवन मिशन’ के तहत जून 2026 तक हर घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन पाइपों की सप्लाई न होने और रेट बढ़ने से ठेकेदारों ने हाथ खड़े करना शुरू कर दिया है।

इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकानों में भी प्लास्टिक पाइप और पानी की टंकियों की कमी से निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। सिंचाई विभाग की परियोजनाएं भी इस मंदी की चपेट में हैं।

मजदूरों के सामने आजीविका का बड़ा संकट

कारखानों में काम कम होने का सबसे बुरा असर उन श्रमिकों पर पड़ रहा है जो ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों से यहां रोजी-रोटी की तलाश में आए हैं। काम की कमी के कारण अब मजदूरों को छंटनी का डर सताने लगा है।

हालांकि उद्योगपति अपने कुशल कारीगरों को रोकने के लिए अपनी जेब से नुकसान सहकर भी उन्हें रोके हुए हैं, लेकिन उत्पादन में आ रही भारी गिरावट के चलते यह ज्यादा दिनों तक मुमकिन नहीं लग रहा।

बाजार में बढ़ेगी महंगाई की तपिश

इस औद्योगिक संकट का असर सिर्फ कारखानों तक सीमित नहीं (War Impact On Industries) रहेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा। प्लास्टिक से बनने वाली रोजमर्रा की चीजों से लेकर पैकेजिंग मटेरियल के दाम बढ़ना तय है।

खाद्य पदार्थों और अन्य सामानों की पैकेजिंग महंगी होने से बाजार में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल उद्योग जगत और सरकार दोनों की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालातों पर टिकी हैं कि कब यह युद्ध थमे और सप्लाई लाइन बहाल हो।

Exit mobile version