बिलासपुर। शासकीय माता शबरी नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में शुक्रवार को ’21वीं सदी का विकलांग विमर्श’ पुस्तक का विमोचन (Viklang Vimarsh Book) किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक, विशिष्ट अतिथि डॉ. के.के. भंडारी और मदनमोहन अग्रवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नंदिनी तिवारी ने की। वक्ताओं ने दिव्यांगजनों के प्रति समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने पर बल दिया।
‘विकलांग विमर्श’ समाज को देगा नई सोच Viklang Vimarsh Book
मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि यह पुस्तक समकालीन समाज में दिव्यांगता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और दिव्यांग विमर्श को नई दिशा देने वाली साबित होगी।
समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
विशिष्ट अतिथि डॉ. के.के. भंडारी ने कहा कि दिव्यांग विमर्श के क्षेत्र में समाज को जागरूक करने के लिए इस तरह के आयोजनों की लगातार आवश्यकता है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रयासों से जुड़े रहने की बात कही। वहीं मदनमोहन अग्रवाल ने अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के उद्देश्य, कार्यों और सामाजिक योगदान की जानकारी दी।
मानसिक संवेदनशीलता पर भी दिया गया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्राचार्य डॉ. नंदिनी तिवारी ने कहा कि केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक संवेदनशीलता भी समाज के लिए (Viklang Vimarsh Book) जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों के प्रति मानवता का व्यवहार नहीं करते, वास्तविक रूप से वही विकलांग हैं। उन्होंने दिव्यांग विमर्श को समाज के अन्य महत्वपूर्ण विमर्शों से जोड़कर देखने की आवश्यकता बताई।
संपादक मंडल के प्रयासों की सराहना
पुस्तक के संपादक मंडल में डॉ. इसाबेला लकड़ा, डॉ. बेला महंत और डॉ. दीपिका महोबिया शामिल रहीं, जिनके प्रयासों से पुस्तक प्रकाशित हो सकी। डॉ. इसाबेला लकड़ा ने अतिथियों का परिचय कराया और संपादकीय विचार रखे। कार्यक्रम में सरस्वती वंदना डॉ. शोभा महिस्वर ने प्रस्तुत की, जबकि संचालन डॉ. बेला महंत ने किया। अंत में डॉ. अर्चना शुक्ला ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
