Vijay Sharma Naxal Policy : विधानसभा में खुलासा, विजय शर्मा बोले – 1496 इनामी समेत 2937 नक्सलियों ने किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन नक्सलवाद और पुनर्वास नीति का मुद्दा (Vijay Sharma Naxal Policy) प्रमुखता से सदन में गूंजा। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में गृहमंत्री विजय शर्मा ने राज्य में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए।

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उन्होंने बताया कि 9 फरवरी 2026 तक राज्य में कुल 2937 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 1496 इनामी नक्सली भी शामिल हैं। यह आंकड़ा राज्य में चलाए जा रहे आत्मसमर्पण और पुनर्वास अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।

विधानसभा में उठे सवाल के दौरान विक्रम मंडावी ने सरकार से यह जानना चाहा कि वर्तमान नक्सल पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं और इनामी नक्सलियों को घोषित पुरस्कार राशि का भुगतान किस स्थिति में है। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने नक्सलियों को अब तक आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और कितनी राशि अभी लंबित है।

इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रारंभिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है। अब तक इस मद में कुल 5 करोड़ 64 लाख रुपए वितरित (Vijay Sharma Naxal Policy) किए जा चुके हैं। हालांकि, इनामी नक्सलियों के लिए घोषित कुल पुरस्कार राशि में से अभी भी 49 करोड़ 34 लाख रुपए का भुगतान किया जाना शेष है, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा।

गृहमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वास योजना के अंतर्गत दी जाने वाली आर्थिक सहायता को सीधे उपयोग के लिए तुरंत उपलब्ध नहीं कराया जाता, बल्कि इसे एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रखा जाता है। उन्होंने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के नाम पर राशि जमा की जाती है और वे निर्धारित अवधि, आमतौर पर तीन वर्ष बाद, बैंक प्रक्रिया के माध्यम से उस राशि का उपयोग कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जुड़ सकें और पुनर्वास प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी हो।

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सदन में प्रस्तुत आंकड़ों से यह भी संकेत मिला कि राज्य में नक्सल उन्मूलन के साथ-साथ पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या और उनके पुनर्वास के लिए दी जा रही सहायता यह दर्शाती है कि सरकार इस दिशा में दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।

विधानसभा में उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नक्सलवाद केवल सुरक्षा से जुड़ा विषय (Vijay Sharma Naxal Policy) नहीं है, बल्कि इसके समाधान के लिए सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लंबित पुरस्कार राशि का वितरण कब तक पूरा होता है और पुनर्वास योजना किस तरह से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने में सफल होती है।

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