Vedanta vs Adani JAL Case : सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को नहीं मिली राहत, अडाणी की ₹14,535 करोड़ की बोली पर बरकरार रहा सस्पेंस

कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा रुख अख्तियार (Vedanta vs Adani JAL Case) किया है। अदालत ने फिलहाल राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उस आदेश में दखल देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें अडाणी ग्रुप द्वारा जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग ठुकरा दी गई थी। अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली ‘वेदांता लिमिटेड’ के लिए यह एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

CJI की पीठ का फैसला, NCLAT ही करेगा अंतिम निर्णय

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई (Vedanta vs Adani JAL Case) करते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि NCLAT आगामी 10 अप्रैल से इस पर अंतिम जिरह शुरू करने वाला है, इसलिए शीर्ष अदालत का हस्तक्षेप अभी उचित नहीं है। अदालत ने वेदांता और अडाणी एंटरप्राइजेज, दोनों को ही अपने-अपने तर्क न्यायाधिकरण के समक्ष मजबूती से रखने की सलाह दी है।

अडाणी बनाम वेदांता, कौन दे रहा है ज्यादा कीमत?

अदालत में बहस के दौरान आंकड़ों की जंग भी देखने को मिली। वेदांता की ओर से पेश दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उनकी बोली अडाणी ग्रुप से कहीं अधिक बेहतर है। सिब्बल ने कोर्ट को बताया:

वेदांता का प्रस्ताव: लगभग ₹17,926.21 करोड़।

अडाणी की बोली: करीब ₹14,535 करोड़।

सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब लेनदारों (Creditors) को वेदांता से ₹3,000 करोड़ से ज्यादा मिल सकते हैं, तो कम कीमत वाली योजना को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है? उन्होंने इसे ऋणदाताओं के हितों के खिलाफ बताया।

निगरानी समिति पर ‘चेक एंड बैलेंस’ लागू (Vedanta vs Adani JAL Case)

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने स्टे नहीं दिया, लेकिन एक ‘सुरक्षा कवच’ जरूर तैयार कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जेपी एसोसिएट्स की निगरानी समिति (Monitoring Committee) बिना NCLAT की पूर्व अनुमति के कोई भी “बड़ा नीतिगत फैसला” नहीं ले सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि 10 अप्रैल की सुनवाई से पहले कंपनी की स्थिति में कोई ऐसा बदलाव न आए जो बाद में विवाद का कारण बने।

दिग्गज वकीलों की फौज और 10 अप्रैल की डेडलाइन

इस कानूनी लड़ाई में देश के सबसे बड़े चेहरे आमने-सामने हैं। जहाँ वेदांता की पैरवी कपिल सिब्बल कर रहे हैं, वहीं अडाणी ग्रुप का पक्ष मुकुल रोहतगी (Vedanta vs Adani JAL Case) रख रहे हैं। ऋणदाताओं की समिति (CoC) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अपनी दलीलें दे रहे हैं। अब सबकी नजरें 10 अप्रैल पर टिकी हैं, जब NCLAT यह तय करेगा कि जेपी एसोसिएट्स का भविष्य अडाणी के हाथों में जाएगा या वेदांता की ऊंची बोली खेल पलट देगी।

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