रायगढ़ स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे के बाद समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर भाजपा सांसद और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल ने आपत्ति जताई है।
उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के इस कदम को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताते हुए कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। जिंदल ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकती है। (Vedanta Raigarh Case)
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नवीन जिंदल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि उद्योगपतियों को बिना ठोस सबूतों के निशाना बनाया जाएगा तो इससे देश के निवेश परिवेश पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि निवेशकों में यह संदेश जाएगा कि किसी भी औद्योगिक दुर्घटना की स्थिति में शीर्ष प्रबंधन को सीधे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इससे भविष्य में निवेश निर्णय प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थिर और भरोसेमंद निवेश वातावरण जरूरी है। (Vedanta Raigarh Case)
जिंदल ने कहा कि रायगढ़ हादसे में मजदूरों की मौत बेहद दुखद है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन बिना विस्तृत जांच के अनिल अग्रवाल का नाम सीधे एफआईआर में शामिल करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकारी उपक्रमों में दुर्घटनाएं होती हैं, तो क्या वहां के चेयरमैन के खिलाफ भी इसी तरह एफआईआर दर्ज की जाती है। उनके अनुसार, कार्रवाई तथ्यों और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए, न कि केवल अनुमान के आधार पर। (Vedanta Raigarh Case)
उन्होंने कहा कि औद्योगिक सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ निवेश और उद्योगों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण भी आवश्यक है। जिंदल ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाए और उसी आधार पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी से उद्योग जगत में नकारात्मक संदेश जाता है, जिससे निवेश प्रभावित हो सकता है। (Vedanta Raigarh Case)
गौरतलब है कि रायगढ़ स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे के बाद अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड सहित आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई को लेकर उद्योग जगत में भी चर्चा तेज हो गई है और निवेश माहौल पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
