लेखक : रवि कुमार माँझी
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में लड़ाई आज भी जारी है, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत हो गई थी। ईरान ने जवाब में इज़राइल और खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले करना जारी रखा है, जो आम जगहों और एनर्जी सुविधाओं सहित नॉन-मिलिट्री टारगेट तक फैल गए हैं। लड़ाई तेज़ी से बढ़ी है, जिसमें हाल के दिनों में साइप्रस और लेबनान भी शामिल हो गए हैं, और सभी तरफ़ नुकसान और मौतों के आकड़े बढ़ रहे है।
जानिए ईरान में क्या हो रहा है?
अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर 28 फरवरी को बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें राजधानी तेहरान और पूरे देश के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर, मिलिट्री साइट्स और लीडरशिप को निशाना बनाया। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1989 से देश का नेतृत्व कर रहे थे, हमलों की पहली लहर के दौरान मारे गए वहीँ इज़राइल की सेना ने कहा कि शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दर्जनों और सीनियर लोग भी मारे गए।
बीते शनिवार और रविवार को भी अमेरिका और इज़राइल ने ज़रूरी साइट्स को निशाना बनाना जारी रखा है। इज़राइल ने कहा कि इसमें एक गुप्त न्यूक्लियर कंपाउंड भी शामिल है। इन हमलों के बावजूद भी ईरान ने बार-बार ज़ोर दिया है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। ईरानी रेड क्रिसेंट कि एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इज़राइली हमले शुरू होने के बाद से ईरान में मरने वालों की संख्या 787 से अधिक हो गई है। वहीँ अमेरिका बेस्ड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स इन ईरान (HRANA) की रिपोर्ट के अनुसार 1,000 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 181 बच्चे शामिल हैं।
ईरान ने बीते शनिवार को दक्षिणी ईरान में IRGC बेस के पास एक लड़कियों के स्कूल पर हमला करने के लिए अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाया और कहा कि इसमें 160 से ज़्यादा लोग मारे गए। अमेरिका ने कहा कि वह घटना की रिपोर्ट देख रहा है, जबकि इज़राइल ने कहा कि उसे इलाके में किसी भी मिलिट्री ऑपरेशन की “पता नहीं” है। ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग पूरी तरह से रोक दी गई है और एयरस्पेस बंद कर दिया गया है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने अमेरिका और इज़राइली हमलों को “बिना उकसावे के, गैर-कानूनी और नाजायज़” बताया है, और जवाब में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कहा कि उसने तेल अवीव और दूसरी जगहों पर इज़राइली सरकारी और मिलिट्री जगहों को निशाना बनाया है जिसके बाद से अमेरिकी बेस वाले देश जैसे- कतर, बहरीन, जॉर्डन, यूनाइटेड अरब अमीरात और कुवैत तथा अमेरिकी सहयोगी देश ओमान और सऊदी अरब में भी हमलों की खबरें आई हैं।
ड्रोन ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित राजदूत कार्यालय पर हमला किया और एक ड्रोन ने दुबई स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास एक कार पार्क पर भी हमला किया। ईरान पर हाल के दिनों में सिविलियन जगहों को भी निशाना बनाने का आरोप है जिसमें दुबई के होटल भी शामिल हैं|
हालाँकि अमेरिका और उसके अरब सहयोगियों ने ईरान के हमलों की निंदा करते हुए एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें कहा गया, “सिविलियन और उन देशों को निशाना बनाना जो दुश्मनी में शामिल नहीं हैं यह लापरवाही भरा बर्ताव है”। दूसरी तरफ साइप्रस के एक ब्रिटिश मिलिट्री बेस पर ड्रोन से हमला हुआ जिसका जिम्मेदार ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया गया है| वहीँ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 18 घायल हो गए हैं।
इज़राइल के डिफेंस मिनिस्टर इज़राइल कैट्ज़ ने बीते शनिवार को हुए हमलों को “इज़राइल देश के खिलाफ खतरों को दूर करने” के लिए एक “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” बताया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस समय मिलिट्री एक्शन लेने की ज़रूरत क्यों थी। अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट, मार्को रुबियो ने सोमवार को बताया कि अमेरिका को पता था कि इज़राइली एक्शन होने वाला है,
जिसका मतलब है कि अमेरिका को अमेरिकी सेना पर ईरान के होने वाले हमलों के सामने “प्री-एम्प्टिवली” एक्शन लेना होगा। इसके बाद अमेरिका में कुछ कानून निर्माताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर सवालिया निशान लगते हुए सबूत देने को कहा है कि वह बताएं इस युद्ध में जाने से पहले ईरान खतरा था या नहीं|
आखिर अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला क्यों किया?
इज़राइल और अमेरिका को करीबी दोस्त माना जाता है| वर्ष 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद से ये दोनों देश ईरान के कट्टर दुश्मन बन गए और ईरानी लीडरशिप ने लगातार इज़राइल को खत्म करने की मांग की है और अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताया है। इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का हमेशा विरोध किया है, उनका दावा है कि ईरान न्यूक्लियर बम बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे ईरान ने पूरी तरह से नकार दिया है।
पिछले साल जून में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर 12 दिनों तक के संयुक्त हमले करके न्यूक्लियर और मिलिट्री साइट्स तबाह कर दिया था तभी से वे दावा कर रहें हैं कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में लगा है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के जानकारों के मुताबिक इज़राइल, ईरान को अपने वजूद के लिए खतरा मानता है और ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह से हटाकर सरकार बदलना चाहता है।
अमेरिका ने पहली बार जनवरी में ईरान पर हमला करने की बात खुलकर कही थी, जब उसके सिक्योरिटी फोर्स ने प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा हमला किया था। लेकिन अमेरिका और ईरान ने बातचीत शुरू की और ऐसा लगा कि वे आगे बढ़ रहे हैं, जब तक कि ट्रंप ने यह नहीं कहा कि वे बातचीत के तरीके से “खुश नहीं” हैं। कुछ घंटों बाद अमेरिका और इज़राइल ने हमला करना शुरू कर दिया।
लेबनान में क्या हो रहा है?
बीते सोमवार को लेबनान में जंग का एक नया मोर्चा खुल गया जब मिलिटेंट ग्रुप हिज़्बुल्लाह ने इज़राइली ठिकानों पर रॉकेट दागे। जवाब में इज़राइल ने भी बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्से में हमले किए| मिलिटेंट ग्रुप हिज़्बुल्लाह खुद को ईरान की सरकार का सहयोगी बताते हुए कहा कि वह खामेनेई की हत्या का बदला लेना चाहता है। यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक इस दुश्मनी के बढ़ने से 30,000 से ज़्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
इस जंग का इकॉनमी और एनर्जी पर असर
मिडिल ईस्ट के अस्थिरता ने ग्लोबल इकॉनमी पर असर डालना शुरू कर दिया है। ईरान पर खाड़ी में जहाज़ों पर हमला करने का भी आरोप है वहीँ स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पूरी तरह से बंद है जिससे दुनिया भर में पहुँचने वला तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित है। ओमान के दुकम कमर्शियल पोर्ट और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह टर्मिनल समेत बड़े तेल और गैस हब पर भी हमलों की खबरें आई हैं। इन हमलों की वजह से दुनिया के कुछ सबसे बड़े तेल और गैस प्रोड्यूसर ने प्रोडक्शन रोक दिया है, जिसमें कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) फैसिलिटी और सऊदी अरब की सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी शामिल हैं।
यूनाइटेड नेशन रिफ्यूजी एजेंसी (UNHCR) का कहना है कि मिडिल ईस्ट और उसके बाहर हिंसा बढ़ने से पहले ही काफी लोग दूसरी जगह जा चुके हैं। हमलों के बाद पहले दो दिनों में करीब 100,000 लोग तेहरान छोड़कर चले गए। लेबनान में भी 58,000 लोग अलग-अलग जगहों पर पनाह ले रहे हैं और ये आकड़ा प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
