US India Trade Agreement : अमेरिका का फिर यू-टर्न: ‘अखंड भारत’ का नक्शा हटाया, ट्रेड एग्रीमेंट के बाद मच गई थी वैश्विक चर्चा
US India Trade Agreement
भारत और अमेरिका के बीच इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट के बाद एक बार फिर अमेरिकी रुख को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एग्रीमेंट के ऐलान के तुरंत बाद अमेरिका की ओर से साझा किया गया ‘अखंड भारत’ का नक्शा अब हटा (US India Trade Agreement) लिया गया है। इस नक्शे में पीओके और अक्साई चिन को भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया था, जो अमेरिका की पारंपरिक नीति से अलग माना जा रहा था।
यह पोस्ट United States Trade Representative Office (USTR) की ओर से 7 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई थी। पोस्ट सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई थी, क्योंकि आमतौर पर अमेरिका इन क्षेत्रों को विवादित मानता रहा है। अब USTR ने चुपचाप इस पोस्ट को अपने आधिकारिक अकाउंट से हटा दिया है।
गलती थी या रणनीति?
इस घटनाक्रम को लेकर कूटनीतिक गलियारों में दो तरह की राय सामने आई थी। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि पाकिस्तान और चीन के साथ अमेरिका के मौजूदा तनावपूर्ण संबंधों के बीच यह भारत के प्रति एक जानबूझकर किया गया डिप्लोमैटिक संकेत हो सकता है। वहीं, दूसरी राय यह रही कि यह केवल एक तकनीकी या मानवीय गलती थी।
दरअसल, अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और अक्साई चिन को विवादित क्षेत्र बताता रहा है। ऐसे में अचानक इन इलाकों को भारत का हिस्सा दिखाना उसकी घोषित नीति (US India Trade Agreement) से मेल नहीं खाता। अब पोस्ट हटाए जाने के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका ने विवाद बढ़ने से पहले ही कदम पीछे खींच लिया।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत की ओर से बार-बार यह दोहराया जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत सरकार पाकिस्तान और चीन द्वारा किए गए किसी भी दावे को सिरे से खारिज करती रही है। ऐसे में अमेरिकी पोस्ट को हटाया जाना नई कूटनीतिक बहस को जन्म दे रहा है।
ट्रेड डील में भी बदली भाषा
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने हालिया दिनों में रुख बदला हो। भारत-अमेरिका घरेलू व्यापार समझौते पर सहमति के बाद व्हाइट हाउस ने समझौते की शर्तों को लेकर एक फैक्ट शीट जारी की थी। इसमें कहा गया था कि भारत अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर से अधिक के उत्पाद खरीदेगा।
हालांकि, एक दिन बाद ही White House ने इसमें संशोधन (US India Trade Agreement) कर दिया। नई भाषा में कहा गया कि भारत अमेरिकी उत्पादों को लेकर ‘खरीदने का इरादा रखता है’, यानी इसे बाध्यकारी शर्त से बदलकर संभावनात्मक बयान बना दिया गया। इसे भारत के पक्ष में एक नरमी के तौर पर देखा जा रहा है।
क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
अखंड भारत के नक्शे को हटाना और ट्रेड डील की भाषा में बदलाव – दोनों ही घटनाएं यह दिखाती हैं कि भारत-अमेरिका संबंधों में भले ही रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही हो, लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर अमेरिका अब भी संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल, नक्शा हटाए जाने के बाद यह साफ है कि अमेरिका अपने पारंपरिक कूटनीतिक रुख पर लौट आया है, लेकिन यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा को लेकर नई चर्चाओं को जरूर जन्म देगा।
