राजनांदगांव में शुक्रवार शाम जैसे ही भारतीय वन सेवा परीक्षा का परिणाम सामने आया, शहर में खुशी का माहौल बन गया। परिवार से लेकर परिचितों तक लगातार बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। मोहल्ले में रहने वाले लोग भी सुष्मिता सिंह की सफलता को लेकर चर्चा करते नजर आए। कई युवाओं ने इसे मेहनत और धैर्य की बड़ी मिसाल बताया।
घर के बाहर रिश्तेदारों और जानने वालों का आना जाना (UPSC Result) लगा रहा। परिवार के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से तैयारी में जुटीं सुष्मिता सिंह ने आखिरकार भारतीय वन सेवा में चयन हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया।
भारतीय वन सेवा में हुआ चयन
संघ लोक सेवा आयोग की ओर से भारतीय वन सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी किया गया, जिसमें 148 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इस सूची में छत्तीसगढ़ की सुष्मिता सिंह ने 32वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त की है।
उनकी इस उपलब्धि के बाद राजनांदगांव समेत पूरे प्रदेश में खुशी जताई जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच भी उनकी सफलता चर्चा का विषय बनी हुई है।
राजनांदगांव से शुरू हुआ सफर : UPSC Result
सुष्मिता सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजनांदगांव के जेएमजे नवजीवन स्कूल और रॉयल किड्स स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर और भिलाई के अलग अलग स्कूलों में पढ़ाई पूरी की। बारहवीं तक की पढ़ाई के बाद उन्होंने देहरादून से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाने का बन चुका था।
नौकरी छोड़कर की तैयारी
बीटेक पूरी करने के बाद सुष्मिता सिंह ने नौकरी भी की, लेकिन तैयारी में पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाने की वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में लगा दिया। लगातार मेहनत और धैर्य के साथ आखिरकार उन्हें पांचवें प्रयास में सफलता मिली।
पिता भी रहे वन सेवा अधिकारी
सुष्मिता सिंह का परिवार पहले से वन सेवा से जुड़ा (UPSC Result) रहा है। उनके पिता भारतीय वन सेवा के अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने छत्तीसगढ़ में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वर्तमान में उनके पिता सेवानिवृत्त होकर भिलाई में रह रहे हैं। परिवार का माहौल और मार्गदर्शन भी सुष्मिता की तैयारी में मददगार माना जा रहा है।
सफलता का दिया यह मंत्र
सुष्मिता सिंह ने अपनी उपलब्धि का श्रेय परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत को दिया है। उनका कहना है कि धैर्य और निरंतर प्रयास से ही बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता के बाद अब कई युवा उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच भी उनकी चर्चा हो रही है।
