मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि विकास को नई गति देने की दिशा में लगातार (Ujjain Jaora Greenfield Highway) बड़े फैसले ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना स्थानीय क्षेत्र के समग्र विकास की नई पहचान बनेगी। लगभग 5017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाईवे किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए आर्थिक प्रगति का नया मार्ग तैयार करेगा।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में आए किसान प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के कल्याण को केंद्र में रखकर योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि विकास मॉडल को मजबूत करने के लिए GYAN पहल को आगे बढ़ाते हुए इंडस्ट्रियलाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस किया गया है।
किसानों के लिए कनेक्टिविटी सबसे बड़ी जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को अपनी उपज बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए बेहतर सड़क नेटवर्क आवश्यक है। इसी सोच के तहत प्रदेश में सड़क और राजमार्गों का व्यापक विस्तार किया जा रहा है। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड परियोजना इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे पूरे क्षेत्र में व्यापार, परिवहन और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उज्जैन जिले के घट्टिया और नागदा विधानसभा क्षेत्रों से आए किसान प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना को नॉन-एलीवेटेड पैटर्न पर त्वरित मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री का स्वागत एवं सम्मान किया। जनप्रतिनिधियों ने इसे क्षेत्र के विकास के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी एरिया के विस्तार से उज्जैन, नागदा, खाचरौद और रतलाम सहित पूरे क्षेत्र का संतुलित विकास होगा। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में गंभीर नदी बांध को जोड़ते हुए नए सड़क मार्ग को मंजूरी दी गई है, जिससे उज्जैन और रतलाम के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
किसानों को उड़द पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस
किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने बड़ा संकेत देते हुए कहा कि सरकार ग्रीष्मकालीन उड़द उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। इसके साथ ही सरसों को भावांतर भुगतान योजना में शामिल किया जाएगा तथा चना, मसूर, तुअर सहित दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसान हितैषी निर्णयों को प्राथमिकता दे रही है और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
दूध उत्पादन और पोषण पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश का दूध उत्पादन अभी देश के कुल उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बच्चों को पोषण मिलेगा और दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
किसान बनेंगे ऊर्जादाता और उद्यमी
सरकार आने वाले तीन वित्तीय वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पावर पंप उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इससे सिंचाई लागत कम होगी और किसान अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों और फूड पार्क के विकास से किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर बाजार मिलेगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि सुधारों के संयुक्त प्रयासों से मध्यप्रदेश तेजी से आर्थिक रूप से सशक्त राज्य के रूप में उभरेगा।

