छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, जिन्हें सियासी गलियारों में ‘बाबा’ के नाम से जाना (TS Singhdeo Bilaspur Visit) जाता है, एक बार फिर एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ समय से दिल्ली और भोपाल के दौरों तक सीमित रहने वाले सिंहदेव ने अचानक बिलासपुर, मुंगेली और कबीरधाम का सघन दौरा कर राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश कांग्रेस में नए सिरे से संगठन को खड़ा करने की कवायद चल रही है और दीपक बैज अपनी नई टीम तैयार करने में जुटे हैं।
सिंहदेव के इस दो दिवसीय (5 और 6 अप्रैल) दौरे को केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक अपने प्रभाव को फिर से जीवित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा दिग्गज धरमलाल कौशिक के घर पहुँचने के मायने (TS Singhdeo Bilaspur Visit)
दौरे की शुरुआत में ही सिंहदेव ने तब सबको चौंका दिया जब वे सीधे वरिष्ठ भाजपा नेता और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के निवास पर पहुँचे। हालांकि, यह मौका दुखद थावे कौशिक के बड़े भाई भुलाऊ प्रसाद कौशिक के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने गए थे। लेकिन राजनीति में ‘टाइमिंग’ का बड़ा महत्व होता है। सिंहदेव और कौशिक की इस आत्मीय मुलाकात ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत संबंधों की मर्यादा आज भी कायम है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत भी कौशिक के घर दस्तक दे चुके हैं।
पुराने साथियों को टटोलने की कोशिश
सिंहदेव का यह दौरा खास तौर पर उन कार्यकर्ताओं और नेताओं पर केंद्रित रहा, जो फिलहाल संगठन के मुख्य पदों पर नहीं हैं लेकिन जमीन पर अच्छी पकड़ रखते हैं। कोटा के रेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम के बाद उन्होंने कोटा में विवेक वाजपेयी, लोरमी में पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष पवन अग्रवाल और बोरतरा में पूर्व विधायक भूपेंद्र सिंह के घर जाकर व्यक्तिगत संवाद किया। मुंगेली के डिंडौरी में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में उनकी मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया।
संगठन में ‘मौन’ के बीच सक्रियता के संकेत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ढाई साल के सीएम वाले फॉर्मूले के बाद सिंहदेव की इच्छा प्रदेश संगठन की कमान संभालने की थी, लेकिन फिलहाल वहां कोई बड़ी हलचल नहीं दिख रही है। ऐसे में कबीरधाम के पंडरिया में जिला अध्यक्ष नवीन जायसवाल और मुंगेली में संजीत बनर्जी से मुलाकात करना यह दर्शाता है कि सिंहदेव अब सीधे ‘कैडर’ से जुड़ रहे हैं। उन्होंने पूरे दौरे के दौरान वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों और कांग्रेस की सांगठनिक मजबूती पर विस्तार से चर्चा की।
क्या है इस दौरे का असली संदेश?
सिंहदेव का यह अंदाजसीधे कार्यकर्ताओं के घर जाना और व्यक्तिगत दुख-सुख में शामिल होनापुरानी शैली की राजनीति की याद दिलाता है। कांग्रेस के भीतर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बाबा आने वाले समय में किसी बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी कर रहे हैं या फिर वे सिर्फ अपने समर्थकों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि वे अभी मैदान में डटे हुए हैं। कारण जो भी हो, लेकिन सिंहदेव के इस दौरे ने बिलासपुर संभाग की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है।
