अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाते हुए NATO के भविष्य पर तीखी टिप्पणी (Trump NATO Warning) की है। एक हालिया इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि जो देश इस अहम समुद्री मार्ग से लाभ उठाते हैं, उन्हें उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए। उन्होंने यहां तक संकेत दिया कि अगर सहयोगी देशों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो NATO के भविष्य के लिए यह अच्छा संकेत नहीं होगा।
ट्रंप ने क्या कहा(Trump NATO Warning)
ट्रंप ने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जिन देशों को आर्थिक और ऊर्जा आपूर्ति का फायदा मिलता है, उनके लिए यह उचित है कि वे उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में भूमिका निभाएं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर इस अपील पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आती, या नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है, तो NATO के भविष्य के लिए यह “बहुत बुरा” हो सकता है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान से जुड़े तनाव के बीच इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और LNG की ढुलाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य या सुरक्षा संकट सिर्फ क्षेत्रीय मसला नहीं रहता, बल्कि उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।
सहयोगियों से कैसी मदद चाहते हैं ट्रंप
ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्हें सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य और लॉजिस्टिक (Trump NATO Warning) मदद चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने माइनस्वीपर जैसे युद्धपोतों, समुद्री सुरक्षा सहयोग और अन्य जरूरी सैन्य समर्थन की जरूरत का जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के लिए खड़ा रहा है, इसलिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-कौन देश इस छोटे लेकिन अहम प्रयास में साथ आता है।
यूक्रेन और पुराने सहयोग का भी जिक्र
ट्रंप ने अपनी बात को मजबूत करने के लिए यूक्रेन का उदाहरण भी दिया। उनका कहना था कि अमेरिका ने पहले कई मौकों पर अपने सहयोगियों के हित में कदम उठाए, जबकि अब वह देखना चाहते हैं कि जरूरत पड़ने पर वही सहयोगी अमेरिका की कितनी मदद करते हैं। इस बयान को NATO देशों पर सार्वजनिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
ब्रिटेन पर भी जताई नाराजगी
ट्रंप ने ब्रिटेन को लेकर भी नाराजगी जताई और संकेत दिया कि उन्हें लंदन से ज्यादा तेज और स्पष्ट समर्थन की उम्मीद थी। साथ ही, कई देशों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। जापान ने फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में जहाज भेजने की कोई योजना नहीं बताई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने भी नौसैनिक भागीदारी से दूरी दिखाई है। यूरोपीय संघ इस मुद्दे पर संभावित कदमों पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी तक एकसमान रुख सामने नहीं आया है।
बढ़ते तनाव के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश
ट्रंप का यह बयान सिर्फ सुरक्षा नीति तक सीमित नहीं माना (Trump NATO Warning) जा रहा, बल्कि इसे NATO और पश्चिमी सहयोगी ढांचे के भीतर जिम्मेदारी बांटने की बहस से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को साझा दायित्व बनाना चाहता है, जबकि कई सहयोगी देश अब भी अपने विकल्प तौल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह दबाव कूटनीतिक समझौते में बदलता है या NATO के भीतर नई दरारों को जन्म देता है।
