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Tribal Heritage Workshop : जनजातीय गौरव, इतिहास और अध्यात्म पर मंथन; छात्राओं ने रखा दृष्टिकोण, विद्वानों ने बढ़ाया ज्ञान

Tribal Heritage Workshop

Tribal Heritage Workshop

9 दिसंबर 2025 को शासकीय माता शबरी महाविद्यालय (Tribal Heritage Workshop) में “जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत : ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। सुबह सभा कक्ष में मुख्य अतिथि का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया और पारंपरिक सम्मान प्रदान करते हुए अतिथियों को मंच तक लाया गया,

Tribal Heritage Workshop

जिससे कार्यक्रम का वातावरण और भी गरिमामय हो उठा. कार्यशाला की शुरुआत जननायकों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद संयोजक डॉ. इसाबेला लकड़ा ने विषय प्रवर्तन एवं स्वागत भाषण दिया।

मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्योति रानी सिंह ने अपने विस्तारपूर्ण उद्बोधन में जनजातीय नायकों के संघर्ष, शौर्य और बलिदान की ऐतिहासिक (Tribal Heritage Workshop) कड़ियों को जोड़ा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान रंग या रूप से नहीं बल्कि गुण और स्वाभिमान से होती है।

Tribal Heritage Workshop

प्राचीन काल में प्रकृति-समन्वय और सामुदायिक जीवन के सिद्धांतों पर आधारित जनजीवन आज भी समाज के लिए प्रेरक प्रतीक हैं। उन्होंने शिक्षा के विकास, परंपरागत मूल्यबोध और जनजातीय संस्कृति की मूल आत्मा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय बदला है, लेकिन जनजातीय चेतना आज भी उतनी ही जीवंत है.

कार्यक्रम के साहित्यिक सत्र में एम.ए. हिंदी की छात्रा निशा सारथी ने बिरसा मुंडा पर आधारित सशक्त कविता प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने ध्यानपूर्वक सुना। इसके बाद एम.ए. इतिहास की कुमारी निक्की पटवा ने छत्तीसगढ़ के वीर शहीद वीर नारायण सिंह के संघर्षपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला।

Tribal Heritage Workshop

इसी क्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ. शशिकला सिंह ने छत्तीसगढ़ के इतिहास में जनजातीय नायकों की भूमिका, विभिन्न आंदोलनों तथा विद्रोहों के सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण किया।

कार्यक्रम का संचालन एम.ए. अर्थशास्त्र की नेहा उरांव ने सहज और संक्षिप्त शैली में किया। सहसंयोजक डॉ. अनुपा तिर्की ने अंत में आभार ज्ञापन देते हुए सभी सहभागी विद्यार्थियों, वक्ताओं एवं आगंतुकों का धन्यवाद किया।

महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक — डॉ. आरती सिंह ठाकुर, डॉ. अर्चना शुक्ला, डॉ. शोभा मंगतोर, डॉ. ललित साहू, बेला महंत, डॉ. वंदना राठौर, डॉ. सुरेखा देवांगन, डॉ. रश्मि जैन, डॉ. दीपिका महोभिया, खगेश्वरी साहू, भारतनंद मानिकपुरी, सौरभ, डॉ. आरती राठौर, चित्रलेखा वैष्णव सहित अनेक छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं और विषय से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया।

यह कार्यशाला न केवल ज्ञान-विस्तार का अवसर बनी बल्कि जनजातीय (Tribal Heritage Workshop) गौरव और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक विचारात्मक कदम भी सिद्ध हुई।

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