The Race to Shed One’s Horns and Become a Calf: दिग्विजय सिंह और आमिर खान के नक्शेकदम पर चलकर उमर अब्दुल्ला ने भी उम्र के आखिरी पड़ाव में दूसरी शादी कर ली तो क्या गुनाह कर दिया? एक मौलाना ने इस शादी को नाजायज ठहराया है। अरे भैया, नेताओं और अभिनेताओं का हर फैसला जायज होता है।
जाति, धर्म के नियम कायदे तो गरीबों के लिए हैं। इनका आदर्श यह गाना है – न उम्र की सीमा हो न जन्मों का हो बंधन, जब प्यार करे कोई देखे केवल मन… यह गाना ही अक्ल के अंधे और गांठ के पूरे बूढ़े बैलों को सिंग कटवाकर बछड़ा बनने पर बाध्य करता है।
