संपादकीय: सुप्रीम कोर्ट की बंगाल सरकार को कड़ी फटकार

Editorial: बंगाल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही वहां बवाल मचना ही शुरू हो गया है। मालदा में बड़ी संख्या में लोग वोटरलिस्ट से अपना नाम काटे जाने के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। जाहिर है यह तब नाटक सत्तारूढ़ टीएमसी के इशारे पर ही हो रहा है था। प्रदर्शनकारियों ने ममता सरकार की सह पर दुहसाहस दिखाया और 7 चुनाव अधिकारियों को बंधक बना लिया जिन्हें घंटो रोके रखा गया और चुनाव कार्य को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

चुनाव आयोग ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए यह टिप्पणी की है कि बंगाल में कानून और व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए बंगाल के डीजीपी को नोटिस जारी किया है और चुनाव आयोग को इस मामले की सीबीआई अथवा एनआईए के जांच कराने की इजाजत भी दे दी है।

गौरतलब है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंबे समय से एसआईआर के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है क्योंकि इससे उनका वोट बैंक खिसक गया है किन्तु किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि बंगाल में चुनाव आचार सहिंता लगने के बाद भी ममता बनर्जी अपने समर्थकों से इस तरह की हरकत करवाएंगी।

बहरहाल इस घटना से चुनाव आयोग को सबक लेना चाहिए और बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतली चाहिए तथा केन्द्रीय सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ाने पर भी गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। बंगाल का चुनाव इतिहास रक्त रंजित रहा है और इस बार भी वहां शांतिपूर्ण चुनाव होने की संभावना क्षीण है। इसलिए चुनाव आयोग को और ज्यादा एहतियाती कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

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