अभियोजन साक्षी के रूप में न्यायालय में उपस्थित न होने को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पाक्सो एक्ट) कमलेश जगदल्ला की अदालत ने थाना अंबिकापुर में पदस्थ उपनिरीक्षक रंभा साहू के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
अदालत ने (Sub Inspector Penalised) के तहत उपनिरीक्षक पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे आगामी माह के वेतन से एकमुश्त काटकर न्यायालय में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस दंडादेश को उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज करने का भी आदेश जारी किया गया है।
अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सरगुजा को निर्देशित किया है कि जुर्माने की राशि उपनिरीक्षक के वेतन से काटकर 20 दिवस के भीतर न्यायालय में जमा कराई जाए तथा सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि किए जाने की पुष्टि भी न्यायालय को भेजी जाए। आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक रायपुर एवं पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज, अंबिकापुर को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
प्रकरण के अनुसार, न्यायालय में विचाराधीन एक मामले में उपनिरीक्षक रंभा साहू को अभियोजन साक्षी के रूप में 3 जनवरी 2026 को उपस्थित होने के लिए समंस जारी किया गया था, जिसकी विधिवत तामील भी हो चुकी थी। इसके बावजूद वे निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुईं और न ही अपनी अनुपस्थिति के संबंध में कोई पूर्व सूचना दी गई। बाद में कारण बताओ नोटिस का जवाब एक महिला आरक्षक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
कारण बताओ नोटिस के उत्तर में उपनिरीक्षक ने यह तर्क दिया कि 3 जनवरी 2026 को श्री गुरु गोविंद सिंह जी के 359वें प्रकाश पर्व के अवसर पर शोभायात्रा में कानून व्यवस्था ड्यूटी में व्यस्त रहने के कारण वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सकीं। हालांकि अदालत ने इस स्पष्टीकरण को सद्भाविक नहीं मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि समंस प्राप्त होने के बावजूद न्यायालय में पेश न होना, अनुपस्थिति की कोई सूचना न देना तथा नोटिस के उत्तर में भी खेद व्यक्त न करना न्यायालय के आदेशों के प्रति उदासीनता, अनुशासनहीनता और कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही को दर्शाता है।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि उपनिरीक्षक पूर्व में भी न्यायालय के आदेशों के पालन में उदासीन रही हैं, जिसके चलते इस बार (Sub Inspector Penalised) के तहत कठोर कार्रवाई की गई है। अदालत ने प्रकरण में अगली सुनवाई अभियोजन साक्ष्य हेतु 12 जनवरी 2026 को नियत की है। यह आदेश न्यायालयों द्वारा पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
