गर्मी में आक्रामक हुए आवारा कुत्ते शहरवासियों की सुरक्षा पर संकट

स्थानीय निकायों की ढिलाई से सड़कों पर बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक


आशीष दुबे

अंबिकापुर/नवप्रदेश। सरगुजा जिले के शहरी इलाकों में आवारा कुत्तों का संकट लगातार गहराता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव साफ नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि भीषण गर्मी के बीच कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो रहा है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

रविवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में एक कर्मचारी ही इन कुत्तों का शिकार बन गया। डॉग कैचर्स टीम सुबह विशुनपुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसर से आवारा कुत्तों को पकड़े पहुंची थी। इसी दौरान कुत्तों ने इन पर हमला कर दिया, जिसमें आकाश कुमार घायल हो गया। हालांकि हमला करने के बाद भी परिसर से चार कुत्तों को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर ले गई। आकाश को अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया। टीम ने कार्रवाई करते हुए चार आवारा कुत्तों को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेजा, लेकिन यह कदम समस्या के व्यापक समाधान के लिहाज से नाकाफी माना जा रहा है। शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई स्थानों पर ये कुत्ते झुंड में घूमते नजर आते हैं और राहगीरों, बच्चों तथा बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं।

घर से बाहर निकलना मुश्किल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। हर गली में कुत्तों का झुंड है, कब कौन हमला कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। दूसरी ओर नगर निगम का दावा है कि आवारा कुत्तों का उत्पात खत्म करने शहर में नगर निगम इन्हें पकडऩे अभियान चला रहा है। अभियान के तहत शहर से अब तक डॉग कैचर्स टीम 20 आवारा कुत्तों को पकड़ चुकी है। इनमें से 16 की नसबंदी कर वापस छोड़ भी दिया है। अन्य कुत्तों को यहां रखा है। हालांकि जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का असर भी नहीं के बराबर दिख रहा है। अब तक की कार्रवाई केवल कुत्तों की गिनती और सीमित पकड़-धकड़ तक सिमटी हुई है।

गर्मी में कुत्तों का स्वभाव चिड़चिड़ा और आक्रामक
पशु चिकित्सकों के अनुसार गर्मी के मौसम में कुत्तों का स्वभाव अधिक चिड़चिड़ा और आक्रामक हो जाता है। पानी और भोजन की कमी के कारण वे जल्दी भड़कते हैं और समूह में हमला करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। ऐसे में नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और मानवीय तरीके अपनाना जरूरी है। कानूनी दृष्टिकोण से भी यह मामला गंभीर है।

24 घंटे के भीतर लगवाएं एआरवी इंजेक्शन
रेबीज एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा वायरल संक्रमण है, मुख्य रूप से पागल जानवरों (कुत्ते, बिल्ली, बंदर) के काटने या लार से मनुष्यों में फैलता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) को प्रभावित करता है। ये लाइसोवायरस के कारण होता है। रेबीज से बचने 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है।

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