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Soumya Chaurasia Conditional Bail : शराब घोटाले में बड़ा मोड़, सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट से सशर्त जमानत, जांच पर बनी रहेगी नजर

Soumya Chaurasia Conditional Bail

Soumya Chaurasia Conditional Bail

बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में अहम घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट ने सशर्त जमानत (Soumya Chaurasia Conditional Bail) दे दी है। जमानत याचिका पर सुनवाई छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जस्टिस अरविंद वर्मा की एकल पीठ में हुई। आदेश शनिवार को जारी किया गया, जिससे लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया।

सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय और राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में शीर्ष अदालत के निर्देशों के मद्देनजर विलंब संभव नहीं है। इसके बाद 20 फरवरी को सुनवाई पूरी हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर की।

यह मामला तब और चर्चित हुआ था जब कथित तौर पर 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय ने शुरू की। एजेंसी के अनुसार, आबकारी नीति और अवैध वसूली के जरिए बड़े पैमाने पर अनियमितताएं (Soumya Chaurasia Conditional Bail) की गईं। जांच के दायरे में कई अधिकारी और कारोबारी भी आए। इससे पहले चौरसिया को कोयला घोटाले के मामले में भी गिरफ्तार किया गया था, जहां बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी।

शराब घोटाले में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे पहले खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने नौ फरवरी को निर्देश दिया था कि वे पुनः हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करें और मामले की प्राथमिकता से सुनवाई की जाए। इसी क्रम में त्वरित सुनवाई हुई और अब उन्हें सशर्त जमानत मिल गई है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि तत्कालीन व्यवस्था के दौरान कुछ अधिकारियों और कथित सिंडिकेट के जरिए अवैध वसूली का नेटवर्क संचालित हुआ। इस प्रकरण में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नाम भी सामने आए थे। बचाव पक्ष ने हालांकि आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए कहा कि बार-बार नई एफआईआर दर्ज कर प्रताड़ित किया जा रहा है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि सशर्त जमानत का अर्थ यह है कि जांच प्रक्रिया जारी रहेगी और अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन अनिवार्य (Soumya Chaurasia Conditional Bail) होगा। मामले की अगली सुनवाई और जांच की दिशा पर सबकी नजर टिकी है, क्योंकि यह प्रकरण प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र दोनों के लिए संवेदनशील माना जा रहा है।

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