संपादकीय: सोनम वांगचूक की छात्रों से अपील

Editorial: नीट पेपल लीक मामले को लेकर पिछले 26 दिनों से अनसन कर रहे सोनम वांगचूक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है। डनहोंने जंतर मंतर पर आंदोलनरत छात्रों से शांति बनाये रखने की अपील भी की है। गौरतलब है कि सोनम वांगचूक की अनसन के कारण तबियत लगातार बिगड़ती जा रही थी इसके बावजूद वे अस्पताल में भी अपना अनसन तोडऩे को राजी नहीं हुए थे। विपक्षी पार्टियों के 65 सांसदों ने भी उनसे अनसन तोडऩे का अनुरोध किया था किन्तु वे अनसन खत्म करने तैयार ही नहीं थे वे अपनी 3 सुत्रीय मांगो को लेकर सरकार से लिखित आश्वासन चाहते थे।

आखिरकार केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने उनसे अस्पताल में भेंट कर उन्हें लिखित आश्वासन दिया तब कही जाकर सोनम वांगचूक ने अपना अनसन खत्म करने की घोषणा की है। उनका अनसन टूटना निश्चित रूप से संतोष की बात है। सोनम वांगचूक की तीनों मांगो पर सरकार ने सहमति जता दी है। उनकी पहली मांग यह थी कि पेपरलीक रोकने के लिए सरकार गंभीर प्रयास करे और सख्त कानून बनाये। इस पर सरकार न सिर्फ सहमत हो गई है बल्कि तत्काल मंत्री परिषद की बैठक बुलाकर पेपरलीक रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने का मसौदा भी तैयार कर चुकी है। यह विधेयक अब सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार सोनम वांगचूक की इस मांग को भी मानने के लिए तैयार हो गई है कि आंदोलन के दौरान जिन छात्रों के ऊपर पुलिस केस हुए हैं। उन्हें वापस लिया जाएगा तथा नीट परीक्षा पेपर लीक के समय जिन छात्रों ने आत्महत्या की थी उनके परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। गौरतलब है कि अनसन के दौरान सोनम वांगचूक शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे थे लेकिन अब उन्होंने इस मांग से किनारा कर लिया है। जबकि कॉकरोच जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल अभी भी शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं।

संसद में इस मुद्दे को लेकर आज चौथे दिन भी विपक्ष ने भारी हंगामा किया जिसकी वजह से संसद की कार्यवाही सोमवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार पेपरलीक मामले पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष धमेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभीजीत दीपके ने भी एलान कर दिया है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होगा तब तक जंतर मंतर पर यह आंदोलन बदस्तूर जारी रहेगा।

ऐसे में अब यह देखना होगा कि सोनम वांगचूक की तीनों प्रमुख मांगे सरकार द्वारा मान लिये जाने के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन खत्म होता है या नहीं। वैसे इनके भी प्रतिनीधियों से सरकार बातचीत की पहल कर चुकी है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पेपरलीक मामलों की पुनावित्ति रोकने के मामले के लिए पूरे एजुकेशन सिस्टम को बदलने को तैयार है और इसके लिए कड़ा से कड़ा कानून बनाने जा रही है।

इसके बाद भी यदि कॉकरोच जनता पार्टी अपना आंदोलन प्रदर्शन जारी रखना चाहती है तो यह उनका मौलिक अधिकार है किन्तु उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आंदोन शांतिपूर्ण रहे। अब तक इस आंदोलन के दौरान वहां जिस तरह के नारे लगे हैं और गंदी गंदी गालियों की बौछार की गई है उससे इन आंदोलकारी युवाओं के प्रति आम जनता की सहानुभूति कम होती जा रही है। बहरहाल अब जबकि सरकार उनकी प्रमुख मांगो को मानने के लिए तैयार हो चुकी है तो उन्हें भी अपनी हटधर्मिता छोडऩी चाहिए और विपक्षी पार्टियों को भी यह बात समझनी चाहिए कि इस मसले का हल संसद से ही निकलेगा सड़क पर तमाश करने से नहीं।

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