Somvati Amavasya 2024: सोमवती अमावस्या पर ‘यह’ छोटा सा काम करने से जीवन में आएंगे बड़े सकारात्मक बदलाव!

-8 अप्रैल को सोमवती अमावस्या और 9 अप्रैल को गुढ़ीपड़वा
-नए साल से पहले जीवन की समस्याओं से छुटकारा पाने का मौका

Somvati Amavasya 2024: हिन्दू वर्ष का अंतिम दिन फाल्गुन अमावस्या है! सोमवार के दिन पडऩे के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। यह तिथि सोमवार के दिन पडऩे के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। रात के अंधेरे में ठंडी रोशनी देने वाला चंद्रमा अमावस्या के दौरान अनुपस्थित रहता है।

उनकी कमी महसूस होती है। इसलिए अमावस्या (Somvati Amavasya 2024) के दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है। साथ ही सोमवार के दिन भगवान महादेव से प्रार्थना करते हैं, क्योंकि जोड़ी में अमावस्या होने के कारण इस दिन चंद्रमा और भगवान महादेव की पूजा करने का विशेष महत्व है।

इस दिन शाम को सूर्यास्त के बाद शुद्ध होकर भगवान के सामने दीपक जलाना चाहिए। धूपबत्ती लहरानी चाहिए। महादेव की आरती कहनी चाहिए। इसके बाद पूरे घर में कपूर की आरती करनी चाहिए। इसके बाद महादेव को सफेद फूल और बेल चढ़ाना चाहिए और आसमान की ओर देखकर चंद्रमा का स्मरण करना चाहिए और तुलसी के पास एक फूल चंद्रमा को अर्पित करना चाहिए।

इस छोटी सी पूजा के बाद अगले दो स्लोक का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए। भक्तों का अनुभव है कि इन दोनों स्लोकों से जीवन में अटके कार्यों को गति देने और कठिनाइयों को दूर करने के नए रास्ते खोजने के लिए महादेव और चंद्र की कृपा प्राप्त होती है।

ज्योतिष शास्त्र (Somvati Amavasya 2024) के अनुसार वेदों में भगवान शिव और चंद्रदेव को समर्पित दो स्रोतों का उल्लेख है। इन सूत्रों का शुभ जाप करने से व्यक्ति को विशेष लाभ होता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। जानिए शिवाष्टकम स्त्रोत और चंद्र स्त्रोत।

शिवाष्टक स्तोत्र:

चंद्र स्तोत्र:

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