शहर में चलाए गए भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान प्रशासन के हाथ एक ऐसा मामला लगा, जिसने सबको हैरान कर दिया। शुरुआती जांच में सामने (Social Welfare Action) आया कि कुष्ठ रोग से जूझ रहा 50 वर्षीय व्यक्ति, जो भीख मांगता दिखता था, वास्तव में तीन मकानों, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सर्राफा क्षेत्र से मिली सूचना के बाद इस व्यक्ति को अभियान के तहत बचाया गया। जांच में पता चला कि उसके पास तीन पक्के मकान हैं, जिनमें एक तीन मंजिला भवन भी शामिल है। इतना ही नहीं, उसने तीन ऑटो रिक्शा किराये पर दे रखे हैं और एक कार से भीख मांगने जाता था, जिसके लिए उसने अलग से ड्राइवर भी रखा हुआ था।
बताया गया कि यह व्यक्ति पहियों वाली छोटी गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता था और वर्ष 2021-22 से इस गतिविधि (Social Welfare Action) में सक्रिय था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने सर्राफा क्षेत्र में कई लोगों को चार से पांच लाख रुपये तक उधार दे रखे थे, जिनसे वह रोजाना ब्याज वसूल करता था। ब्याज से उसे प्रतिदिन 1,000 से 2,000 रुपये तक की आमदनी होती थी, जबकि भीख से अलग से 400 से 500 रुपये रोज मिल जाते थे।
प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल इस व्यक्ति को एक आश्रय गृह में रखा गया है। जिला प्रशासन ने साफ किया है कि इंदौर को भिक्षुकमुक्त बनाए रखने के लिए ऐसे अभियानों को लगातार जारी रखा जाएगा और संपत्तियों से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच के बाद कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक संगठनों ने मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील (Social Welfare Action) की है। बताया गया कि यह व्यक्ति पहले निर्माण कार्य में मिस्त्री के रूप में काम करता था, लेकिन बीमारी और सामाजिक उपेक्षा के चलते उसने यह रास्ता चुना। अब प्रशासन इस पूरे मामले की तह तक जाकर सच सामने लाने की तैयारी में है।

