झारखंड में 10 फरवरी के बाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR in Jharkhand) की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है। 8 जनवरी को चुनाव आयोग की टीम राज्य में तैयारी का जायजा लेने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2003 की वोटर लिस्ट के आधार पर मैपिंग का लगभग 78% काम पूरा हो चुका है।
SIR के दौरान उन मतदाताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है जिन्होंने गलत दस्तावेज दिए हैं। वर्तमान वोटर लिस्ट की 2003 की लिस्ट से पैरेंटल मैपिंग, मतदान केंद्रों की जियो फेंसिंग और रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया जारी है। अब तक पैरेंटल मैपिंग में करीब 12 लाख वोटर्स चिह्नित किए गए हैं, जिनके दस्तावेज समय पर न आने पर नाम काटे जा सकते हैं। इसमें मृत या लंबे समय से गैरहाजिर वोटर्स भी शामिल हैं।
बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और मतदाताओं में बड़ी चिंता है। BLOs पर दबाव बढ़ा हुआ है, और जिन मतदाताओं के नाम 2003 की लिस्ट में नहीं हैं, वे नाम कटने की आशंका से चिंतित हैं। साहिबगंज के एक BLO ने कहा, “वीडियो कॉल मीटिंग में डिप्टी कमिश्नर ने साफ कहा कि यदि टारगेट पूरा नहीं हुआ तो नौकरी से निलंबित किया जा सकता है।”
झारखंड के मुख्य चुनाव कार्यालय के अनुसार, SIR का यह पहला चरण पैतृक मैपिंग के नाम से जाना जाता है। इसमें 2024 की लिस्ट को 2003 की लिस्ट से मिलाना होता है। राज्य में लगभग 2.65 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं, और 30,000 पोलिंग बूथ संचालित हो रहे हैं। BLOs को हर बूथ की 2024 लिस्ट को 2003 की लिस्ट से मिलाना है, और नए जोड़ें गए वोटरों के लिए माता-पिता का संबंध साबित करना अनिवार्य है।

