छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा की चोरी और अवैध परिवहन को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार (RFID Tag Mineral Vehicles Chhattisgarh) कर लिया है। मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में ‘छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भण्डारण) नियम, 2009’ में व्यापक, कड़े और ऐतिहासिक संशोधनों को हरी झंडी दे दी गई है। सरकार के इस बड़े फैसले से राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी और खनिज माफियाओं के अवैध कारोबार पर पूरी तरह ताला लग जाएगा।
नए नियमों के मुताबिक, अब राज्य में खनिज का परिवहन करने वाले प्रत्येक वाहन में आरएफआईडी (RFID) टैग और आधुनिक व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) लगाना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। इस तकनीक के लागू होने से अब खनिज लेकर निकलने वाली हर एक गाड़ी की लाइव लोकेशन, उसकी स्पीड और रूट पर सीधे मंत्रालय और संबंधित विभाग से 24 घंटे पैनी नज़र रखी जा सकेगी। अगर कोई वाहन तय रास्ते से भटकता है या अवैध जगह जाता है, तो तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम को मिल जाएगी।
तकनीक से होगा ग्रेड का सही आकलन, सिक्योरिटी डिपॉजिट में वृद्धि : RFID Tag Mineral Vehicles Chhattisgarh
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, खनिजों की चोरी रोकने के लिए केवल वाहनों की ट्रैकिंग ही नहीं होगी, बल्कि खनिजों के सटीक ग्रेड निर्धारण और उसकी सही मात्रा के आकलन के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक आधारित व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए भंडारण अनुज्ञापत्रधारियों (लाइसेंस धारकों) से वसूल की जाने वाली भंडारण शुल्क (Storage Fee) की राशि तथा सिक्योरिटी डिपॉजिट में भी भारी वृद्धि कर दी है, ताकि केवल वैध और गंभीर लोग ही इस व्यवसाय में रहें।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: ईमानदार व्यापारियों को बड़ी राहत
एक तरफ जहाँ अवैध उत्खनन करने वालों पर इस फैसले से सर्जिकल स्ट्राइक (RFID Tag Mineral Vehicles Chhattisgarh) हुई है, वहीं दूसरी तरफ नियमों का पालन करने वाले वैध और ईमानदार कारोबारियों को सरकार ने बड़ी राहत भी दी है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार को आसान बनाने) के तहत अब वैध लाइसेंस होल्डर्स को जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त जमीन स्वीकृत किए जाने और दो अलग-अलग भंडारण लाइसेंसों को आपस में समामेलित (एकजाई यानी मर्ज) करने का बेहद सरल प्रावधान लागू किया गया है।
प्रशासन का दावा है कि इन कड़े और तकनीकी बदलावों से जहां एक ओर अवैध खनन और पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, वहीं दूसरी ओर टैक्स और रॉयल्टी की चोरी रुकने से राज्य के खजाने में ऐतिहासिक राजस्व वृद्धि सुनिश्चित होगी।
