छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों पर प्रशासन (Raipur Hospital Notice) ने सख्ती बढ़ा दी है। राजधानी रायपुर के 21 से अधिक निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि आयुष्मान के नए पोर्टल पर डॉक्टरों, बिस्तरों और स्टाफ से जुड़ी जानकारी अपलोड करने में अब तक देरी क्यों की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को अंतिम चेतावनी देते हुए 13 फरवरी तक जवाब और सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, आयुष्मान योजना से जुड़े छोटे और मझोले अस्पतालों को पहले भी कई बार पत्र भेजे गए थे, लेकिन इसके बावजूद कई संस्थानों ने आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड नहीं किए। अब संबंधित अस्पतालों को अपने रिकॉर्ड और लैपटॉप के साथ सीधे सीएमओ कार्यालय में उपस्थित होने को कहा गया है।
नए पोर्टल पर अपडेट न होने से बढ़ी चिंता
आयुष्मान भारत योजना के तहत शुरू किए गए HEM-2.0 पोर्टल पर अस्पतालों से संबंधित स्टाफ, डॉक्टरों और इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जानकारी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। विभाग की ओर से राज्य और जिला स्तर पर अब तक छह पत्र जारी किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से बार-बार रिमाइंडर आने के बाद स्टेट नोडल एजेंसी ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में रायपुर के निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर यह भी पूछा गया है कि आखिर पोर्टल अपडेट में देरी का कारण क्या है।
IMA ने नियम शिथिल करने की उठाई मांग
इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) खुलकर सामने (Raipur Hospital Notice) आ गया है। आईएमए का कहना है कि नए पोर्टल की कुछ शर्तें छोटे अस्पतालों के लिए व्यवहारिक नहीं हैं। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर नियमों को शिथिल करने का आग्रह किया है।
मंत्री करेंगे संयुक्त मंथन
आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से इस विषय पर चर्चा की। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य, वित्त विभाग और आईएमए के साथ संयुक्त रूप से मंथन किया जाएगा। इसके बाद आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
आईएमए अध्यक्ष ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम रायपुर पहुंची थी। इस दौरान डॉक्टरों की संख्या और अन्य शर्तों को लेकर चर्चा हुई, जिसमें केंद्रीय अधिकारियों ने भी माना कि कुछ बिंदुओं पर नियमों में ढील देना व्यावहारिक हो सकता है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की सख्ती और अस्पतालों की परेशानी के बीच यह मामला लगातार तूल पकड़ता (Raipur Hospital Notice) जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर होने वाला मंथन आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए दिशा तय कर सकता है।

