छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने (IPS Arun Dev Gautam) आ रही है। राज्य सरकार ने आखिरकार प्रदेश के 12वें पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) के नाम पर मुहर लगाने की तैयारी कर ली है।
सूत्रों की मानें तो 1992 बैच के कद्दावर आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम का छत्तीसगढ़ का अगला ‘नया कप्तान’ बनना लगभग तय है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और यूपीएससी (UPSC) के नोटिस के बाद सरकार अब किसी भी तरह की देरी के मूड में नहीं है और कल अदालत खुलने से पहले ही इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
आखिर सरकार को क्यों दिखानी पड़ी इतनी जल्दबाजी? (IPS Arun Dev Gautam)
दरअसल, छत्तीसगढ़ में पिछले काफी समय से ‘प्रभारी’ DGP के भरोसे काम चल रहा था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की थी। शीर्ष अदालत ने ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार’ मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया था कि राज्यों में प्रभारी DGP की परंपरा अब नहीं चलेगी।
यूपीएससी ने भी सरकार से सवाल किया था कि जब मई 2025 में ही दो अधिकारियों का पैनल भेज दिया गया था, तो अब तक स्थाई नियुक्ति क्यों नहीं हुई? कल यानी सोमवार को कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है, जिससे पहले सरकार आदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहती है।
हिमांशु गुप्ता भी रेस में, पर अरुण देव का पलड़ा भारी
DGP की इस हाई-प्रोफाइल दौड़ में दो नाम प्रमुखता से शामिल थे, अरुण देव गौतम (1992 बैच) और हिमांशु गुप्ता (1994 बैच)। हालांकि, हिमांशु गुप्ता भी एक मजबूत दावेदार माने जा रहे थे,
लेकिन नक्सल मोर्चे पर हालिया बड़ी कामयाबियों और वरिष्ठता को देखते हुए अरुण देव गौतम का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। वे पहले से ही प्रभारी DGP के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ऐसे में सरकार किसी नए प्रयोग के बजाय अनुभव को प्राथमिकता दे रही है।
कानपुर के सरकारी स्कूल से दिल्ली की JNU तक का सफर
आईपीएस अरुण देव गौतम की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक छोटे से गांव अभयपुर के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले अरुण देव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर दिल्ली की मशहूर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
1992 में आईपीएस बनने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश और फिर छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाएं दीं। वे राजनांदगांव के उस दौर में एसपी बनकर भेजे गए थे जब वहां नक्सली हमला हुआ था, और उन्होंने वहां नक्सलियों से जमकर लोहा लिया।
पुरस्कारों से भरा रहा है करियर
अरुण देव गौतम को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और भारतीय पुलिस पदक से नवाजा जा चुका है। इतना ही नहीं, उन्होंने साल 2002 में कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र (UN) के मिशन में भी अपनी सेवाएं दी हैं,
जिसके लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र पदक मिला था। अब छत्तीसगढ़ के पूर्णकालिक DGP के रूप में उनके कंधों पर राज्य की सुरक्षा और नक्सलवाद के खात्मे की एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।
