छत्तीसगढ़ कांग्रेस आज से मनरेगा (मनरेगा) बचाओ संग्राम अभियान के तहत सार्वजनिक (Protest Fasting) विरोध कर रही है। शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता सुबह से शाम तक गांधी की मूर्ति के पास उपवास पर बैठे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (मनरेगा) में किए गए संशोधनों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर पड़ रहे असर के विरोध में उठाया जा रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार सुनियोजित तरीके से मनरेगा (मनरेगा) को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है।
देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी और सम्मानजनक जीवन का आधार रहा है, लेकिन नई योजनाओं के जरिए इसकी मूल भावना को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने VB-G RAM G योजना का हवाला देते हुए कहा कि इससे मनरेगा के संवैधानिक अधिकार कमजोर होंगे और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार के दौरान मनरेगा (मनरेगा) के बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घट रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह नीति गरीब और मजदूर विरोधी है, जिसे वह स्वीकार नहीं करेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर जिला, ब्लॉक और नगर स्तर पर संगठन आज के उपवास और आंदोलन में भाग लेंगे। कांग्रेस ने साफ किया कि विरोध शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मनरेगा (मनरेगा) से जुड़े अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा। कांग्रेस का संकल्प है कि सड़क से लेकर संसद तक मनरेगा को कमजोर करने के हर प्रयास का विरोध किया जाएगा।
