कोरबा जिले के सुतर्रा क्षेत्र में हुए सड़क हादसे के बाद मानवता को शर्मसार (Postmortem Money Demand) करने वाला मामला सामने आया है। उपचार के दौरान मजदूर की मौत के बाद जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए मृतक के स्वजन से रुपये मांगे गए। हालांकि मामला सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और सहायक अधीक्षक के निर्देश पर वसूली गई राशि वापस कराई गई।
जानकारी के अनुसार, बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के ग्राम अरदा निवासी राहुल मरावी (20) रोजी-मजदूरी कर जीवनयापन करता था। वह बीते कुछ दिनों से अपने रिश्तेदार अर्जुन मरकाम के घर रहकर काम कर रहा था। सोमवार देर शाम राहुल और अर्जुन बाइक से बस स्टैंड की ओर पहुंचे थे। अर्जुन बस स्टैंड में रुक गया, जबकि राहुल थोड़ी देर में लौटने की बात कहकर बाइक से निकल गया। काफी देर तक नहीं लौटने पर तलाश शुरू की गई।
इसी दौरान कसनियां के पास सड़क हादसे में एक युवक के घायल होने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि घायल युवक राहुल मरावी ही था, जिसे तेज रफ्तार आयल टैंकर ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए टक्कर मार दी थी। गंभीर रूप से घायल राहुल को पहले कटघोरा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल कोरबा रेफर किया गया।
जिला अस्पताल में उपचार के दौरान राहुल की मौत हो गई। इसके बाद शव को मर्च्युरी में रखवाया गया। पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई के बाद जब स्वजन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए पहुंचे, तब मर्च्युरी में कार्यरत तीन स्वच्छता कर्मियों ने पोस्टमार्टम के नाम पर दो हजार रुपये की मांग कर दी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ने आपस में चंदा कर 1700 रुपये जुटाए, तब जाकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए। सहायक अधीक्षक डॉ. रविकांत जाटवर ने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए किसी भी प्रकार की राशि लेना पूरी तरह गलत है। जानकारी मिलते ही संबंधित कर्मियों को बुलाकर मृतक के स्वजन को रुपये वापस कराए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में सभी सेवाएं निःशुल्क हैं और भविष्य में इस तरह की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्थाओं और संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है, जहां हादसे में जान गंवाने वाले गरीब मजदूर के परिवार को भी न्याय और सम्मान पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

