संपादकीय: विशेष सत्र को लेकर राजनीति अनुचित

Editorial: संसद के बजट सत्र का दूसरा भाग भी खत्म हो गया किन्तु इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर चर्चा नहीं हो पाई न ही नारी वंदन संसोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा जा सका। हालांकि केन्द्र सरकार ने पहले यही तय किया था कि बजट सत्र के दूसरे भाग में ही महिला आरक्षण संसोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा हो जाये और यह विधेयक पारित कर दिया जाये किन्तु इस सत्र का अधिकांश समय हंगामों की भेंट चढ़कर रह गया। इसलिए अब सरकार महिला आरक्षण संसोधन विधेयक पर चर्चा करने के लिए ससंसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बात के संकेत देते हुए कहा है कि संसद के विशेष सत्र में सरकार एक महत्वपूर्ण विधेयक लाएगी किन्तु विपक्ष ने संसद के विशेष सत्र को लेकर राजनीति शुरू कर दी है। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिाकार्जुन खडग़े ने कहा है कि सरकार बंगाल असम और तमिलनाडू तथा केरल के विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखकर संसद का यह विशेष सत्र आनन फानन में इसलिए बुला रही है ताकि वह इसका चुनावी लाभ उठा सके।

खडगे के मुताबिक कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में है और महिला आरक्षण संसोधन विधेयक संसद में रखा जाना चाहिए और इस पर विस्तृत चर्चा करके इसे पारित किया जाना चाहिए। लेकिन इसके लिए संसद का विशेष सत्र तत्काल बुलाना उचित नहीं है क्योंकि सरकार इस मुद्दे का चुनावी लाभ उठाना चाहती है। कांग्रेस के ही नेता जयराम रमेश ने भी इस पर आपत्ति जताई है और उन्होंने तर्क दिया है कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर वहां आदर्श चुनाव आचार सहिंता लागू की गई है।

ऐसे में महिला आरक्षण विधेयक पर विचार विमर्श के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना आचार सहिंता का भी उल्लंघन है और इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस विधेयक को पारित करा कर उन राज्यों की महिलाओं का वोट हासिल करना चाहती है उन्होंने मांग की है कि इसके लिए चुनाव निपटने के बाद 29 अपैल के बाद कभी भी संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। विपक्ष के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए संसदीस कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि संसद का विशेष सत्र कब और कैसे बुलाना है यह सरकार पर निर्भर करता है।

सरकार महिलाओं को जल्द से जल्द 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में है इसलिए यह विशेष सत्र आहुत किया जा रहा है। विपक्ष को इस पर बेवजह की राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है कि कांग्रेस को आखिर इस पर आपत्ति क्या है। अभी तो कांग्रेस ने ही इस पर ऐतेराज जताया है अब बहुत जल्द अन्य विपक्षी पार्टियां भी इस पर आपत्ति उठाएंगी जबकि इस पर राजनीति करना कतई उचित नहीं है।

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