Political Conflict : अशोक गहलोत के करीबी को बताया दलाल...फिर आया भूचाल

Political Conflict : अशोक गहलोत के करीबी को बताया दलाल…फिर आया भूचाल

Political Conflict: Broker told close to Ashok Gehlot ... again came the earthquake

Political Conflict

जयपुर/नवप्रदेश। Political Conflict : राजस्थान सियासी खींचतान के बाद बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। पायलट कैंप के विधायक रामनिवास गांवड़िया ने सीएम गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठौड़ को दलाल बताया है। परबतसर विधायक ने कहा कि सीएम गहलोत ने जूते- चप्पल उठाने वाले को आरटीडीसी का चैयरमेन बनाया है।

विधायक गावड़िया ने हालांकि, गहलोत के करीबी धर्मेद्र राठौड़ का नाम नहीं लिया है, लेकिन इशारा उन्ही की तरफ माना जा रहा है। विधायक ने कहा कि वह बीजेपी के साथ मिलकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे लोग जूते-चप्पल उठाकर राजनीति में आगे बढ़ जाते हैं। रविवार को गावड़िया ने कहा कि  ‘जूते-चप्पल उठाकर सेवा चाकरी की, उन्हें आरटीडीसी अध्यक्ष बना दिया।

ये पार्टी का नुकसान कर रहे हैं। किसी की चापलूसी (Political Conflict) करके नेता बन जाए और किसी विधायक के क्षेत्र में जाकर पार्टी का नुकसान करें तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ राठौड़ कोई जन नेता तो नहीं हैं। कागजी नेता हैं। इनके कहीं आने-जाने से क्या फर्क पड़ने वाला है? काबिलियत होती तो पार्टी टिकट भी देती है। लोगों के बीच जाते हैं तो जनता चुनाव भी जितवाकर भेजती है।

विधायक सोलंकी भी बता चुके हैं दलाल

बता दें, गावड़िया से पहले चाकसू विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने भी गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठौड़ को दलाल बताया था। सोलंकी ने धर्मेंद्र राठौड़ पर सीधा हमला बोला था। सोलंकी ने कहा राठौड़ अवसरवादी है। मौका देखते ही पाला बदल लेते हैं। कभी बीजेपी के लिए दलाली करते थे। इसके बाद धर्मेंद्र राठौड़ ने राजधानी जयपुर में प्रेस वार्ता कर पायलट कैंप के विधायक सोलंकी को जयपुर जिला प्रमुख के चुनाव का हवावा दे गद्दार बताया था। राठौड़ ने कहा कि सोलंकी की गद्दारी की वजह से कांग्रेस बहुमत होते हुई भी जयपुर में जिला प्रमुख नहीं बना सकी।

फिर शुरू हुआ बयानबाजी का दौर

कई दिनों की खामोशी के बाद पायलट कैंप के हमलों (Political Conflict) से प्रदेश की राजनीति में एक बार आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। बता दें, 25 सितंबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद कांग्रेस आलकमान ने पार्टी के नेताओं की बयानबाजी पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी जारी थी। दोनों खेमों के नेता कुछ दिन शांत रहे, लेकिन एक बार फिर बयानबाजी शुरू हो गई है। 

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