Site icon Navpradesh

PESA Law India : नक्सलवाद से मुक्ति के साथ आदिवासी विकास का ‘विश्वास सेतु’ मजबूत करेगी केंद्र सरकार

PESA Law India

PESA Law India

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह माओवादी गतिविधियों से मुक्त कर दिया जाएगा। इसी लक्ष्य के अनुरूप, मोदी सरकार ने आदिवासी बहुल राज्यों में विकास का ‘विश्वास सेतु’ मजबूत करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। यह पहल विशेष रूप से उन राज्यों में की जा रही है, जो पंचायतीराज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA Law India) के दायरे में आते हैं।

हालांकि यह कानून 1996 में लागू हुआ था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे प्रभावी ढंग से लागू कराने में अब तक सबसे अधिक सक्रियता दिखाई है। पंचायतीराज मंत्रालय ने इन राज्यों में कानून के सशक्त क्रियान्वयन और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए कुल 100 अंकों के संकेतक (PESA Indicators) तय किए हैं। इन संकेतकों के माध्यम से आदिवासी वर्ग के जल, जंगल, जमीन के अधिकार, उनकी परंपरा और संस्कृति की रक्षा की जाएगी और पंचायत स्तर पर सुधार के रोडमैप तैयार होंगे।

पेसा कानून लागू होने वाले राज्य

पेसा कानून के तहत आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना आते हैं। मोदी सरकार ने इन क्षेत्रों में विकास और आदिवासी कल्याण पर सतत काम किया है। इसका परिणाम यह है कि दस में से आठ राज्यों ने अपने राज्य पेसा नियम अधिसूचित कर लिए हैं। हाल ही में झारखंड और ओडिशा ने भी इस प्रक्रिया में प्रगति दिखाई है।

संकेतकों से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित

पंचायतीराज मंत्रालय ने बताया कि जमीनी स्तर पर समान और प्रभावी पेसा क्रियान्वयन अभी चुनौती है। इसलिए ये 100 अंकों के संकेतक विकसित किए गए हैं। ये संकेतक राज्यों के प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन करेंगे।

डाटा स्रोत होंगे

अधिसूचित राज्य कानून और नियम

राज्यों के संबंधित आदेश

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल

प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान MIS

साथ ही पंचायत स्तर पर सुधारों की पहचान और उनकी राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग भी जारी की जाएगी। इसके माध्यम से यह देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में पेसा कानून के माध्यम से विकास और सुशासन की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।

आदिवासियों के हाथ में सीधे अधिकार

पेसा कानून ग्राम सभाओं को अधिकार देता है, जिससे आदिवासी समुदाय:

जल, जंगल, जमीन के अधिकार अपने पारंपरिक तरीकों से सुरक्षित रख सकते हैं।

लघु वनोपज जैसे तेंदू पत्ता, बांस आदि के व्यापार में स्वायत्तता और आय अर्जित कर सकते हैं।

स्थानीय विवादों का सामुदायिक समाधान कर सकते हैं।

विकास परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण में परामर्श और सहमति का अधिकार प्राप्त होगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं में सुधार सुनिश्चित किया जाएगा।

इस पहल से आदिवासी बहुल राज्यों में सतत विकास और सुशासन का मॉडल तैयार होगा और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास की दीवार यानी ‘विश्वास सेतु’ मजबूत होगा।

केंद्र सरकार ने आदिवासी बहुल राज्यों में पेसा कानून (PESA Act 1996) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 100 अंकों के संकेतक तैयार किए हैं। इन संकेतकों से ग्राम स्तर पर आदिवासी समुदाय के जल, जंगल और जमीन के अधिकार, परंपरा और संस्कृति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। पंचायत स्तर पर सुधार के रोडमैप बनाए जाएंगे और राज्यों का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग के माध्यम से पारदर्शी ढंग से आंका जाएगा। इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का विश्वास सेतु मजबूत होगा।

Exit mobile version