कुछ आयोजन सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं होते, वे भविष्य की दिशा तय करते हैं। जब युवा उद्यमियों के सपने, निवेश की संभावनाएं और नीति-निर्माताओं की सोच एक ही मंच पर आ जाए, तब माहौल सामान्य नहीं (NIT Raipur Innovation) रहता। ऐसा ही कुछ देखने को मिला एक विशेष आयोजन में, जहां विचारों को केवल सुना नहीं गया, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने की ठोस ज़मीन भी मिली।
यह आयोजन रायपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान परिसर में राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर संपन्न हुआ, जहां फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप द्वारा ‘स्टार्टअप कैपिटल कनेक्ट वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। इस मंच ने स्टार्टअप्स, निवेशकों, नीति प्रतिनिधियों और उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा संवाद में जोड़ा। उद्देश्य स्पष्ट था—नवाचार को पूंजी, मार्गदर्शन और नेटवर्क से जोड़ना।
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली सत्र इंटेंसिव पिचिंग रहा, जिसमें संस्थान द्वारा इनक्यूबेट किए गए 15 स्टार्टअप्स ने अपने बिज़नेस मॉडल प्रस्तुत किए। ये पिच केवल प्रस्तुति नहीं थीं, बल्कि ऐसे विचार थे जिनमें निवेश, रणनीतिक साझेदारी और स्केलेबल ग्रोथ की वास्तविक संभावना (NIT Raipur Innovation) दिखाई दी। इसी क्रम में योग्य स्टार्टअप्स के लिए ₹1.5 करोड़ तक के फंडिंग सपोर्ट की घोषणा ने माहौल को और उत्साहित कर दिया। इससे यह संकेत स्पष्ट हुआ कि मध्य भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम अब प्रयोग के चरण से आगे निकल चुका है।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने भारत में बदलते उद्यमिता परिदृश्य पर विचार रखते हुए कहा कि देश तेजी से नौकरी तलाशने वालों से नौकरी देने वालों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया पहल के प्रभाव को रेखांकित करते हुए इसे युवाओं के आत्मविश्वास से जोड़कर देखा। वहीं, कुलसचिव डॉ. एन. डी. लोंढे ने संस्थान की उस विकास यात्रा को साझा किया, जिसने शिक्षा-केंद्रित मॉडल को अनुसंधान और नवाचार आधारित संस्कृति में परिवर्तित किया।
फाउंडेशन के फैकल्टी इन-चार्ज डॉ. अनुज के. शुक्ला ने बताया कि इनक्यूबेशन नेटवर्क का विस्तार अब 47 इनक्यूबेटर्स तक हो चुका है, जो संस्थान की बढ़ती राष्ट्रीय उपस्थिति को दर्शाता (NIT Raipur Innovation) है। बोर्ड डायरेक्टर प्रो. समीर बाजपेयी ने आत्मनिर्भर भारत की सोच के अनुरूप स्टार्टअप्स के लिए प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाने पर बल दिया।
उद्योग और निवेश के दृष्टिकोण से आयोजित सत्रों ने कार्यक्रम को व्यावहारिक गहराई दी। मेंटरिंग अनुभव, निवेश-तैयारी, पूंजी नियोजन और बैंकिंग समाधानों पर हुई चर्चाओं ने स्टार्टअप्स को केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि स्पष्ट रोडमैप भी दिया। सरकारी प्रतिनिधियों ने राज्य की औद्योगिक नीतियों, स्थानीय नवाचार और ग्रासरूट समस्याओं के समाधान पर आधारित स्टार्टअप्स को मिलने वाले अवसरों को विस्तार से रखा।
कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ, लेकिन इसका प्रभाव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहा। यह आयोजन इस बात का संकेत बनकर उभरा कि एनआईटी रायपुर अब केवल तकनीकी शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता का मजबूत उत्प्रेरक बन चुका है। यह पहल भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति बनाने की दिशा में एक और ठोस कदम के रूप में देखी जा रही है।

