NDPS Court : बढ़ते नशे के कारोबार पर सरकार की बड़ी तैयारी, तीन जिलों में बनेगी विशेष अदालत, नए पदों पर भर्ती भी शुरू

छत्तीसगढ़ में नशे के बढ़ते मामलों को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर बड़ी हलचल दिखाई (NDPS Court) दे रही है। रायपुर, बिलासपुर और महासमुंद में पिछले कुछ समय से मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी के बाद अलग अलग विभागों के बीच लगातार बैठकें चल रही थीं। अब सरकार के नए फैसले के बाद कानूनी और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

राज्य शासन ने मादक पदार्थों से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे के लिए तीन जिलों में विशेष अदालत बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इन अदालतों में केवल एनडीपीएस कानून से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी।

तीन जिलों में बनेगी विशेष अदालत : NDPS Court

नई विशेष अदालतें रायपुर, बिलासपुर और महासमुंद जिले के सरायपाली में गठित की गई हैं। इन अदालतों में ड्रग तस्करी और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी।

अलग अलग न्यायाधीशों को मिली जिम्मेदारी

रायपुर में विशेष अदालत की जिम्मेदारी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश स्मृति किरण थवाइट को सौंपी गई है। बिलासपुर में यह जिम्मेदारी स्मृति किरण त्रिपाठी को दी गई है। वहीं सरायपाली क्षेत्र के लिए पवन कुमार अग्रवाल को विशेष न्यायाधीश बनाया गया है।

11 मई से मानी गई प्रभावी

जारी आदेश के मुताबिक तीनों अदालतें 11 मई 2026 से प्रभावी (NDPS Court) मानी गई हैं। इनका अधिकार क्षेत्र संबंधित जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा तय किया जाएगा।

21 नए पदों को मंजूरी

नई अदालतों के संचालन के लिए कुल 21 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, स्टेनोग्राफर, रीडर, क्लर्क, राइटर और भृत्य के पद शामिल हैं।

लंबित मामलों के जल्द निपटारे पर जोर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अदालत बनने से मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज होगी। साथ ही लंबे समय से लंबित मामलों का बोझ भी कम हो सकेगा।

ड्रग्स मामलों में बढ़ोतरी बनी वजह

पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में ड्रग्स तस्करी और प्रतिबंधित पदार्थों की बरामदगी के मामलों में बढ़ोतरी (NDPS Court) देखी गई है। इसी वजह से विशेष अदालतों की मांग लगातार उठ रही थी।

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