कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता विकास तिवारी को पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया है। उन्होंने झीरम घाटी हमले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कवासी लखमा का नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी। इस मामले को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लेते हुए इसे नार्को टेस्ट की मांग (Narco Test Demand) से जुड़ा अनुशासनहीन आचरण माना है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने पहले विकास तिवारी को प्रवक्ता पद से हटाया और बाद में पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया। इस संबंध में पार्टी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू की ओर से आदेश जारी किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि झीरम घाटी मामले में गठित न्यायिक जांच आयोग के समक्ष पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का नार्को टेस्ट कराए जाने संबंधी आवेदन के मामले में कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसे नार्को टेस्ट की मांग (Narco Test Demand) के जरिए पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य माना गया।
बताया गया है कि विकास तिवारी ने विगत दिनों झीरम नरसंहार वृहद जांच आयोग के चेयरमैन सतीश कुमार अग्निहोत्री और सदस्य गुलाम मिन्हाजुद्दीन को दिल्ली भेजा गया एक लिखित आवेदन सौंपा था। इस आवेदन के साथ साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य सबूत भी संलग्न किए गए थे। यह पूरा मामला नार्को टेस्ट की मांग (Narco Test Demand) के चलते राजनीतिक विवाद का विषय बन गया था।
आवेदन में स्वयं विकास तिवारी समेत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, अमित जोगी, कवासी लखमा और ननकी राम कंवर का नार्को टेस्ट कराए जाने की मांग की गई थी। पार्टी ने इसे संगठनात्मक मर्यादाओं के विरुद्ध मानते हुए नार्को टेस्ट की मांग (Narco Test Demand) के आधार पर कड़ी कार्रवाई की है।

