विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को ऐतिहासिक धरोहरों का मुद्दा अचानक राजनीतिक बहस का कारण (Monsoon Session) बन गया। सदन में बालार्जुन ताम्रपत्र की भाषा को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने सामने आ गए। प्रश्नकाल के दौरान इस विषय पर हुई चर्चा ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
कांग्रेस ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया। वहीं संस्कृति मंत्री ने भी मामले को हल्के में नहीं लिया और सदन में भरोसा दिलाया कि यदि अधिकारियों की ओर से तथ्यात्मक गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञान भारतम अभियान पर उठा सवाल Monsoon Session
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने ज्ञान भारतम अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन का मुद्दा उठाया। उन्होंने बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त ऐतिहासिक बालार्जुन ताम्रपत्र का उल्लेख करते हुए विभागीय जवाब पर आपत्ति जताई।
प्रधानमंत्री के बयान का दिया हवाला
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम मन की बात में इस ताम्रपत्र को ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा हुआ बताया था। जबकि सदन में विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई कि इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री किसी विषय पर जानकारी देते हैं तो देश उस पर भरोसा करता है। ऐसे में दोनों जानकारियों में अंतर क्यों है, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
अधिकारियों पर लगाए गलत जानकारी देने के आरोप Monsoon Session
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारियों ने गलत तथ्य प्रस्तुत किए, जिसकी वजह से मंत्री को भी सदन में गलत जानकारी देनी पड़ी। उन्होंने मांग की कि यदि अधिकारियों की गलती सामने आती है तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने जांच का दिया भरोसा
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में कहा कि यदि इस मामले में अधिकारियों की ओर से विसंगतिपूर्ण जानकारी तैयार की गई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पांडुलिपियों के सत्यापन की भी दी जानकारी
मंत्री ने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत मोबाइल ऐप के माध्यम से छत्तीसगढ़ से कुल 1 लाख 24 हजार 422 पांडुलिपियों का पंजीयन (Monsoon Session) किया गया था। इनमें से 12 हजार 40 पांडुलिपियों का सत्यापन नई दिल्ली स्थित केंद्र द्वारा किया जा चुका है, जबकि 1 लाख 12 हजार 382 पांडुलिपियां तकनीकी या अन्य कारणों से अस्वीकृत हुई हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि मल्हार से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपत्र की खोज वर्ष 1987 में हुई थी। विभागीय अभिलेखों के अनुसार इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी और भाषा संस्कृत दर्ज है। वर्तमान में यह ऐतिहासिक ताम्रपत्र मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के संरक्षण में सुरक्षित है। इसी विवरण को लेकर सदन में विवाद की स्थिति बनी।
