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MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh : रामफल की जिंदगी बदल गई, पशु शेड बना आमदनी का जरिया

MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh

MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh

MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh : जीवन में आगे बढ़ने की ललक रखने वालों के लिए मुश्किलें भी राह बन जाती हैं। सरकारी योजनाओं से जुड़कर जब मेहनती लोग अवसर को पहचानते हैं तो सफलता खुद उनके कदम चूमती है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है कबीरधाम जिले के विकासखंड पंडरिया के ग्राम पंचायत चारभाठाखुर्द के गौ पालक रामफल (MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh) की, जिसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत बने पशु शेड से अपनी आजीविका को नया आयाम दिया।

रामफल पहले मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते थे, लेकिन मन में छोटा-सा व्यवसाय शुरू करने का सपना था। संसाधनों की कमी रास्ते में बाधा बन रही थी। तभी उन्हें ग्राम पंचायत से पता चला कि मनरेगा के तहत अपने पशुधन के लिए पक्का शेड बनवाया जा सकता है। आवेदन किया गया, और पंचायत ने 68 हजार 500 रुपये की राशि से पशु शेड निर्माण की स्वीकृति दी। अक्टूबर 2023 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और लगभग एक माह में यह पूरी तरह तैयार हो गया। निर्माण के दौरान रामफल को 48 दिन का रोजगार मिला, साथ ही गांव के अन्य परिवारों को भी मजदूरी का लाभ मिला। अब यह पशु शेड न केवल उनके पशुओं की सुरक्षा का ठिकाना है, बल्कि आमदनी का स्थायी जरिया भी बन गया है।

आमदनी और पशुधन सुरक्षा दोनों में सहारा बना पशु शेड

पशु शेड नहीं होने से पहले रामफल को कई परेशानियां थीं। बरसात, ठंड और धूप में पशुधन को संभालना मुश्किल होता था। खुले में रहने के कारण गायें अक्सर बीमार पड़ जातीं, जिससे खर्च बढ़ता और आमदनी घटती थी। लेकिन अब पक्का और हवादार पशु शेड (MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh) बन जाने से उनके पशुधन सुरक्षित हैं और दूध उत्पादन भी बढ़ गया है। हर महीने 3 से 4 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई है। घर के लिए भी दूध की जरूरत पूरी हो रही है और अतिरिक्त दूध बेचने से नकद आमदनी मिल रही है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना पशु शेड निर्माण कार्य

पशु शेड निर्माण के दौरान न केवल रामफल को रोजगार मिला बल्कि आसपास के ग्रामीणों को भी इसका लाभ हुआ। कुल 12 मानव दिवस का अतिरिक्त रोजगार सृजन हुआ और करीब 7,500 रुपये मजदूरी के रूप में दिए गए। अब उनका परिवार 2 एकड़ जमीन पर खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर दोहरा लाभ ले रहा है। रामफल (MGNREGA Cattle Shed Success Story Chhattisgarh) कहते हैं पहले पशुओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता रहती थी, लेकिन अब मनरेगा योजना से बनी इस सुविधा ने सभी परेशानियां खत्म कर दीं। वे भविष्य में और गायें पालने की योजना बना रहे हैं ताकि गौपालन को पूर्ण व्यवसाय के रूप में विस्तार दे सकें।

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