पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टिट्यूट (Mekahara Advanced Cardiac Surgery) ने नववर्ष 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ की है। यहां कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने एक ऐसे बुजुर्ग मरीज की जान बचाई, जिनकी हृदय की नसें इतनी संकरी थीं कि पारंपरिक सर्जरी लगभग असंभव मानी जा रही थी।
पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में विभाग ने 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक संपन्न की थीं। इसी अनुभव के साथ नववर्ष में यहाँ एक बेहद जटिल ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) भी सफलतापूर्वक किया गया, जो (Mekahara Advanced Cardiac Surgery) के लिए एक नई मिसाल बन गया है।
रायपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से पीड़ित थीं। जांच में पता चला कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। प्रो. डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, इस अवस्था में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। ऐसी स्थिति में कार्डियोलॉजी टीम और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष के नेतृत्व में ‘हार्ट टीम’ का गठन किया गया और बिना चीर-फाड़ के वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया गया।
इस जटिल प्रक्रिया से पहले मरीज का विशेष CT-स्कैन किया गया। जांच में पता चला कि पैर की नसें पतली और कमजोर थीं। इसके बावजूद (Mekahara Advanced Cardiac Surgery) ने अत्यंत पतले डिलीवरी सिस्टम के सहारे दुर्लभ तकनीक अपनाई, जिससे वाल्व को सुरक्षित रूप से हृदय तक पहुंचाया गया। जन्मजात संरचनात्मक विसंगति के कारण कोरोनरी धमनियां वाल्व के बेहद समीप थीं। दोनों कोरोनरी धमनियों को सुरक्षा देने के लिए स्टेंट डालकर “चिमनी” संरचना तैयार की गई, जिससे वाल्व प्रत्यारोपण सुरक्षित रूप से पूर्ण हुआ।
प्रक्रिया के अंतिम चरण में जब पैर की नस में ब्लॉकेज उत्पन्न हुआ, तो बलून एंजियोप्लास्टी द्वारा रक्त प्रवाह तत्काल बहाल किया गया। लगभग चार घंटे चली इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के पश्चात मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सुचारु रहा और मरीज की धड़कन स्थिर रही।
अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने (Mekahara Advanced Cardiac Surgery) की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तकनीकी सफलता से रोगियों के लिए नई उम्मीदें जागृत हुई हैं। रोगी को हार्ट कमांड सेंटर से डिस्चार्ज कर घर भेजा गया है। मरीज एवं उनके परिजनों ने डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधन और सरकार को धन्यवाद दिया और सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर विश्वास जताया।
