पश्चिम बंगाल की सियासत में आज एक बड़ा अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को अपनी परंपरागत सीट भवानीपुर से विधानसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल (Mamata Banerjee Nomination Bhawanipur) कर दिया है।
पर्चा भरने से पहले ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास से अलीपुर सर्वे बिल्डिंग तक लगभग 800 मीटर का पैदल मार्च किया। इस दौरान सड़कों पर टीएमसी समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे ममता बनर्जी ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया।
294 सीटों पर जीत की अपील और वोटर लिस्ट पर सवाल (Mamata Banerjee Nomination Bhawanipur)
नामांकन के बाद ममता बनर्जी भावुक नजर आईं। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत यहीं से हुई थी। ममता ने न केवल भवानीपुर, बल्कि बंगाल की सभी 294 सीटों पर टीएमसी की जीत सुनिश्चित करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। सीएम ने कहा, “मुझे बहुत दुख है किSIR के नाम पर बंगाल की वोटर लिस्ट से इतने सारे नाम हटा दिए गए हैं।”
शुभेंदु अधिकारी से ‘प्रतिष्ठा’ की जंग
भवानीपुर की यह लड़ाई अब केवल एक विधानसभा सीट की नहीं, बल्कि ‘साख’ की लड़ाई बन चुकी है। ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला बीजेपी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी (Mamata Banerjee Nomination Bhawanipur) से है।
शुभेंदु ने पिछले हफ्ते अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन भरकर अपनी ताकत दिखाई थी। 2026 के इस चुनाव में भवानीपुर सीट पूरे बंगाल की राजनीति का ‘केंद्र बिंदु’ बन गई है, जहाँ हार-जीत के मायने बहुत बड़े होने वाले हैं।
‘मिनी इंडिया’ का मिजाज तय करेगा नतीजा
भवानीपुर को अक्सर ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ बंगाली परिवारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में मारवाड़ी, गुजराती, पंजाबी, सिख, जैन और मुस्लिम मतदाता (Mamata Banerjee Nomination Bhawanipur) रहते हैं। आंकड़ों के लिहाज से यहाँ लगभग 76 प्रतिशत हिंदू (बंगाली और गैर-बंगाली) और 24 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।
विविध संस्कृतियों वाले इस इलाके का मिजाज ही तय करेगा कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी। ममता बनर्जी यहाँ से तीन बार विधायक रह चुकी हैं, ऐसे में उनके लिए यह सीट उनकी राजनीतिक विरासत का अटूट हिस्सा है।
