मल्हार से मिले ऐतिहासिक ताम्रपत्र को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को तीखी बहस देखने (Malhar Copper Plate) को मिली। सदन में यह मामला उठते ही इतिहास से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणिकता और विभागीय रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हो गए। पक्ष और विपक्ष दोनों ने इसे प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान जब ताम्रपत्र की भाषा और लिपि को लेकर अलग अलग जानकारी का मुद्दा सामने आया तो सदन का माहौल गर्म हो गया। बढ़ते विवाद के बीच संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
ताम्रपत्र की भाषा को लेकर उठे सवाल Malhar Copper Plate
विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम में मल्हार से मिले ऐतिहासिक ताम्रपत्र को ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखा हुआ बताया था। वहीं संस्कृति विभाग ने विधानसभा में दिए लिखित जवाब में इसकी भाषा संस्कृत और लिपि ब्राह्मी बताई। इसी अंतर को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
विभाग से पूछा किस आधार पर बदली जानकारी
विधायक ने सवाल किया कि जब आधिकारिक स्तर पर पाली भाषा का उल्लेख किया गया है तो विभाग ने अपने रिकॉर्ड में संस्कृत कैसे दर्ज कर दी। उन्होंने पूछा कि क्या सदन को गलत जानकारी दी गई है और इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं। साथ ही वर्ष 1987 में मिले इन ताम्रपत्रों की वर्तमान स्थिति और संरक्षण की जानकारी भी मांगी।
विपक्ष ने की कार्रवाई की मांग Malhar Copper Plate
मामले पर चर्चा के दौरान वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने भी विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाए। विपक्ष ने कहा कि यदि सदन में गलत जानकारी प्रस्तुत की गई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
मंत्री ने जांच का दिया भरोसा
चारों ओर से उठ रहे सवालों के बीच संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि विभागीय अभिलेखों में अलग जानकारी किस आधार (Malhar Copper Plate) पर दर्ज हुई। जांच में जो भी अधिकारी भ्रामक जानकारी देने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ताम्रपत्र कहां सुरक्षित हैं
सदन में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 1987 में मिले मल्हार के ऐतिहासिक ताम्रपत्र फिलहाल स्थानीय नागरिक संजीव पाण्डेय के संरक्षण में सुरक्षित रखे गए हैं।
