Krishna Janmashtami 2026 Shubh Muhurat: कृष्ण जन्माष्टमी आज, रात इतने बजे से शुरू होगा श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त

आज संपूर्ण भारतवर्ष में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सनातन धर्म में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान श्री हरि विष्णु ने अपना आठवां अवतार भगवान श्रीकृष्ण के रूप में लिया था। द्वापर युग में उनका जन्म कंस के अत्याचारों का अंत करने और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। द्रिक पंचांग के अनुसार, यह भगवान श्री कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है।

जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर घर-घर और मंदिरों में भगवान के बाल रूप ‘लड्डू गोपाल’ का भव्य श्रृंगार किया जाता है। श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में कान्हा का जन्म कराकर अपना उपवास खोलते हैं।

शुभ मुहूर्त और रोहिणी नक्षत्र का समय

अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के योग में जन्माष्टमी मनाना बेहद शुभ माना जाता है। इस वर्ष तिथियों की स्थिति इस प्रकार है:

इसी 45 मिनट की पवित्र अवधि में बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और मुख्य पूजन संपन्न होगा।

पूजन के लिए आवश्यक सामग्री

जन्माष्टमी पूजन के लिए पहले से सामग्री एकत्र कर लें:

विधिवत पूजन प्रक्रिया

  1. प्रातः संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूरे दिन सात्विक आचरण रखते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. मंदिर की सजावट: घर के मंदिर की सफाई करें, फूलों और रोशनी से सजावट करें और कान्हा के लिए झूला तैयार करें।
  3. मध्यरात्रि अभिषेक व श्रृंगार: रात 12 बजे जन्मोत्सव के समय लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें सुंदर वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख पहनाकर दिव्य श्रृंगार करें।
  4. भोग व झूला: कान्हा को झूले में विराजमान कराएं और प्रेमपूर्वक झूला झुलाएं। उन्हें माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग लगाएं।
  5. आरती व पारण: धूप-दीप जलाकर आरती गाएं, अनजाने में हुई भूल की क्षमा मांगें और प्रसाद वितरण के बाद अपना व्रत खोलें।

इन प्रभावशाली मंत्रों का करें जाप

पूजन के समय इन दिव्य मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है:

सुख-समृद्धि के लिए जन्माष्टमी के अचूक उपाय

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