Kiren Rijiju: रिजिजू का संदेश: सेना की देश-रक्षा सर्वोपरि, राजनीतिक छींटाकशी से रखें दूर

नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की सुरक्षा, राजनीतिक बहसों और संसद से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सेना देश की अखंडता और सीमाओं की रक्षा करती है, इसलिए इसे किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए।

सेना को राजनीति से दूर रखने की सख्त अपील

केंद्रीय मंत्री (Kiren Rijiju) ने कांग्रेस नेताओं द्वारा सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इस्तेमाल की गई अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दावली (जैसे ‘सड़क छाप) की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सेना देश की सुरक्षा में तैनात है और राजनीतिक स्वार्थ के लिए उस पर टिप्पणियां करना बेहद अनुचित है।

सीमांकन की स्थिति: उन्होंने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश में कई क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है, जो कि एक ऐतिहासिक विषय है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: पूर्ववर्ती सरकारों की नीति सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित न करने की थी, लेकिन 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती इलाकों में सड़कों का जाल तेजी से बिछाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आईटीबीपी की पेट्रोलिंग पहले से कहीं अधिक मजबूत और चाक-चौबंद है।

‘दिमागी नक्सल’ बयान पर स्पष्टीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उपयोग किए गए ‘दिमागी नक्सल’ (Kiren Rijiju) शब्द पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी उन लोगों के लिए है जो देश के संविधान के विरुद्ध कार्य करते हैं। हथियारबंद नक्सलवाद भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन माओवादी विचारधारा से जुड़े कुछ लोग आज भी जवानों के बलिदान पर खुशियां मनाते हैं।

संसद में हंगामा और विपक्षी रवैया

संसद के सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों का खंडन करते हुए मंत्री ने कहा कि गृह मंत्री सुबह से रात तक सदन में उपस्थित रहते थे। उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे अपनी पार्टी के सांसदों द्वारा संसद में मचाए जा रहे हंगामे और अमर्यादित आचरण पर रोक लगाएं।

अन्य प्रमुख विषयों पर सरकार का पक्ष

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