खबरों की मरम्मत: पेंडेंसी निपटाओं नहीं तो खुद निपट जाओ, साहब का तोता पकड़ने, आगे कौन, नेता या अफसर?

पेंडेंसी निपटाओं नहीं तो खुद निपट जाओ

आगामी 1 मई से शुरू होने वाले ‘सुशासन तिहार’ को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सख्त तेवर से नौकरशाही खौफजदा है। दरअसल कलेक्टरों और विभागीय सचिवों को शुद्ध हिन्दी में समझा दिया गया है कि 30 अप्रैल तक राजस्व समेंत सभी विभागों के पेडिंग प्रकरणों का निपटारा कर दिया जाए। एक मई से राज्य भर में घूमकर अपनी सरकार के ढाई साल के कामकाज का मूल्यांकन करने निकल रहे मुख्यमंत्री को यदि इस दरम्यान किसी ग्रामीण ने भरी भीड़ में बता दिया कि उसके प्रकरण का निपटारा अफसर नहीं कर रहे हैं तो अफसर या कर्मचारी वही निपट सकते हैं। क्योकि पिछले सुशासन तिहार में साय के सख्त तेवरों का खामियाजा अफसर भुगत चुके है।

‘आप’ से बेअसर छत्तीसगढ़

दिल्ली में आम आदमी पार्टी में बगावत का असर छत्तीसगढ़ में होगा या नही इस पर कुछ लोग राजनीतिक जुगाली कर रहे है। हालांकि इसकी वजह है कि छत्तीसगढ़ी मूल के संदीप पाठक आप से राज्यसभा में थे वे भी भाजपा में चले गए है सो स्वाभाविक तौर पर राज्य की राजनीति पर बात तो होगी, लेकिन आम आदमी पार्टी राज्य में पहले भी मैदानी तौर पर बेअसर ही रही है। राज्य बनने के बाद 2018 को यदि छोड़ दे तो राज्य की द्विदलीय राजनीतिक चेतना ने बसपा तक को विधानसभा से बाहर कर दिया हंै तो फिर आप की गुंजाइश कहा? जिस जोगी पिता-पुत्र ने 2018 में बसपा के साथ मिलकर 7 सीटे और 12 फीसदी वोट पाए थे वे आज शून्य पर है। बहरहाल तीसरे मोर्चे के रूप में गोंडवाना गंणतंत्र पार्टी का एक विधायक है। लेकिन यदि कोई कहे कि संदीप पाठक के भाजपा में जाने से छत्तीसगढ़ की राजनीतिक सेहत पर कोई असर होगा तो ऐसा संभव दिखता नहीं है।

साहब का तोता पकड़ने में फायर ब्रिगेड के उडऩे लगे तोते

फायर ब्रिगेड की टीम को हमेशा आग लगने पर ही याद किया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में पहली बार ऐसा हुआ जब तोते को पकड़ने फायर ब्रिगेड बुलाई गई। इस काम में फायर ब्रिगेड कर्मियों को काफी संघर्ष भी करना पड़ा। दरअसल, बस्तर इलाके के एक प्रमुख शहर में होम गार्ड के जिला सेनानी का तोता ऊंचे पेड़ की ऊंची टहनी पर बैठ गया। अब तोता प्रेमी साहब ने अपने होमगार्ड के जवानों को तोते को नीचे लाने का आदेश दे दिया। तोता नीचे आने को तैयार नहीं था। किसी ने सलाह दी कि फायर ब्रिगेड की टीम अगर पानी की बौछार करे तो ऊंची टहनी पर बैठा तोता उड़कर नीचे आ सकता है। इस सलाह पर अमल करने के आदेश दिये गए। इसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने तोते पर पानी की बौछार की। फलत: पानी के प्रेशर से एक भवन की छत पर गिरे तोते को वन विभाग का कर्मचारी तोते की तीमारदारी करने ले गया है। पद का दुरुपयोग किये जाने का मामला गरमाने के बाद अब जवाब देने में साहब के तोते उड़ रहे है। साहब कह रहे हैं कि पानी का प्रेशर चेक करने के लिये पेड़ पर पानी की बौछार की गई। अपनी तरह के अनोखे विवाद में उलझ चुके साहब के बारे में कहा जा रहा है कि अब उन्होंने भविष्य में तोते पालने से तौबा कर ली है।

आबकारी, शराबखोरी और चिन्दी चोरी

प्रदेश में बहुचर्चित शराब घोटाले की कई परतें खुल चुकी हैं। लेकिन घोटाले के नए मामले अभी भी लगातार खुल रहे हैं। आबकारी विभाग के अफसरों ने शराब दुकानों में ठेके पर सेल्समैन का काम करने वाले कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ा। पूरे प्रदेश की शराब दुकानों में एजेंसियों के छोटे कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस और अवकाश के दिनों में ड्यूटी का मेहनताना नहीं दिया गया। कुल 115 करोड़ की रकम ओवरटाइम करने पर कर्मचारियों को मिलनी थी। यह रकम डकार ली गई। अवकाश के दौरान काम करने और बोनस के रूप में मिलने वाले 67 करोड़ भी हजम कर लिये गए। इस मामले की जांच कर रही ईओडब्लू ने खुलासा किया है। नकली होलोग्राम और अवैध शराब बिक्री के जरिये हजारों करोड़ रुपए का वारा न्यारा करने वाले अफसरों ने साबित कर दिया है कि सेल्समैन जैसे छोटे कर्मचारियों के साथ चिंदीचोरी करने में भी आबकारी विभाग का कोई मुकाबला नहीं है।

आगे कौन, नेता या अफसर?

आम तौर पर करप्शन के मामलों में सबसे ज्यादा निशाने पर राजनेता ही रहते हैं। लेकिन, छत्तीसगढ़ में नदी की धारा उल्टी बह रही है। यहां नेताओं ने अपनी गर्दन बचा रखी हैं लेकिन अफसर गले तक फंसे हैं। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में डीएमएफ, कोल लेवी, शराब घोटाले, धान लेवी घोटाले और हेल्थ विभाग में गड़बड़ी के अलावा महादेव सट्टा सहित अन्य मामलों में प्रदेश के 47 अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है। सबसे अहम बात ये है कि प्रदेश के 26 आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है। इसी तरह पुलिस महकमे के 6 आईपीएस भी अलग-अलग मामलों में फंसे हैं। जंगल विभाग के 15 अफसर भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि इस तरह के मामलों में अफसरों के मुकाबले राजनेताओं की संख्या काफी कम है। लेकिन खुद को बचाने में प्रदेश के नेताओं की जमात ज्यादा सयानी निकली। अब भविष्य ही बताएगा कि आगामी दिनों में ईडी, सीबीआई और आईटी के शिकंजे में फंसने वालों में पलड़ा किसका भारी रहता है।

ऑफलाइन बिजली बिल में गड़बड़ी

मुख्यालय में बैठकर बिजली की समस्याओं को लेकर रायशुमारी करने वाले अफसरों के लिए एक नई मुसीबत आफलाईन ने खड़ी कर दी है। कवर्धा के एक गांव रवेलीडीह में उपभोक्ताओं ने ऑफलाइन बिजली बिल जमा किया लेकिन विभाग के खाते में वहा के कर्मचारियों ने जमा नहीं किया सो लगभग 20 लाख रुपए का फटका बिजली कंपनी को लगा। अब यह देखा जाना है बाकि है कि बिजली बिल की रकम उड़ाने में और कहां-कहां गड़बड़ घोटाले किये गए हैं। कुछ साल पहले प्रदेश में करीब 12 करोड़ की रकम हजम किये जाने के बाद पॉवर कंपनी के कई अफसर, कर्मचारी सस्पेंड किये गए थे। बाद में सब बहाल हो गए। पता चला है कि 12 करोड़ की रकम भी बिजली कंपनी को वापस नहीं मिली। यानी रकम की वसूली करने में पॉवर कंपनी नाकाम रही। गबन के इस मामले से प्रेरणा लेकर बिजली विभाग में अब 20 लाख के गबन के खुलासे से नई शुरुआत हुई है। पॉवर कंपनी के अफसर अब पूरे प्रदेश में बिजली बिल की चोरी के मामलों की जांच कर रहे हैं।

जंगल में मंगल

जंगल की निगरानी के लिये बीट गार्ड की ड्यूटी लगाई जाती है। उदंती सीतानगर टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी रहवास क्षेत्र में करीब एक लाख पेड़ कट गए और बीट गार्ड को कानोंकान खबर नहीं हुई। दिलचस्प बात ये रही कि कटाई के बाद यहां सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण भी कर लिया गया। जंगल विभाग की ढाई सौ एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जा भी हो गया। बीते कई साल से कटाई जारी रहने के बावजूद जंगल की निगरानी क्यों नहीं की गई। अब यह शोध का विषय है कि बीट गार्ड इतनी गहरी नींद में क्या खा-पी कर सोते रहे। इस मामले में 166 कब्जेधारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। देखना ये है कि इस समयकाल में वहां पदस्थ रहे अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं। वैसे भी यह सर्वविदित है कि जंगल विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जंगल में ही मंगल है।

प्लास्टिक की बोतल में शराब और राजस्व की चिन्ता

राज्य सरकार के राजस्व की रीढ़ के नाम से प्रसिद्ध आबकारी विभाग को शराब से मिलने वाले राजस्व की कमी का अजीबोगरीब कारण सामने आ रहा है। दरअसल विभाग ने तय किया है कि चीफ रेंज के ब्रंाड अब प्लास्टिक के बोतल में दिए जाएंंगे लेकिन इसकी टेंडर और बाकि प्रक्रिया में हो रही देरी से शराब प्रेमी तो परेशान है विभाग भी राजस्व की कमी को लेकर चिन्तित है। दरअसल शराब घोटाले में की आंच अभी ठंडी नहीं हुई है इसलिये दूध के जले अफसर छांछ भी फूंक कर पी रहे है इसलिए जो नुकसान होना है होता रहे कोई अफसर अपनी गर्दन फंसाने तैयार नही है। क्योकि प्लास्टिक की बोतल में 6 दिन से ज्यादा शराब रहने पर पीने वाले के स्वास्थ्य पर असर पडऩे संबधी रिसर्च रिपोर्ट के लेकर विभाग भी संजीदा है।

करेंसी ने दिखाया कमाल, अब पावर की बारी

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के बड़े नौकरशाहों में से एक महिला आईएएस लिफ्ट में फंस गई। वे राजधानी स्थित करेंसी टॉवर के जिम में एक्सरसाइज के लिये जा रही थी। लिफ्ट अचानक बंद हो गई और करीब 40 मीनट तक लिफ्ट में फंसी रहने के बाद उन्होंने इसकी सूचना दूसरे अफसरों को दी। आनन फानन में अफसरों की टीम पहुंची और सीनियर महिला आईएएस को लिफ्ट से बाहर निकाला गया। इसके बाद इसी लिफ्ट में एक कांग्रेस नेता भी फंस गए। उन्हें भी बाहर निकाला गया। मजे की बात ये है कि वे कौनसे अफसर होते है जो जांच कर लिफ्ट को क्लीन चिट देते है। लोग सवाल कर रहे हैं कि एक हफ्ते के भीतर एक सीनियर आईएएस और कांग्रेस नेता के लिफ्ट में फंसने के बावजूद क्लीन चिट कैसे मिल गई। जानकार बता रहे हैं कि क्लीनचिट देने का कमाल करेंसी टॉवर की करेंसी ने दिखाया है। अब इस करेंसी टावर को पावर दिखाने का इन्तजार हंै।

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