जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (JLN H&RC) में पहली बार स्यूचर्ड लेप्रोस्कोपिक सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी (JLNHRC Laparoscopic Surgery Success) सफलतापूर्वक की गई है। छह माह से पैंक्रियाटाइटिस व पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट से पीड़ित CISF जवान पर की गई यह न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया अस्पताल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। मरीज ऑपरेशन के पांच दिन बाद ही स्वस्थ होकर घर लौट गया।
रोगी को पेट दर्द, भारीपन और भोजन में कमी की शिकायत थी। सामान्यतः ऐसे मामलों में ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है, पर JLN टीम ने लेप्रोस्कोपिक तकनीक अपनाते हुए उपचार किया। इससे न केवल बड़ा चीरा व अधिक दर्द टला, बल्कि रिकवरी अवधि भी काफी कम रही।
सर्जरी टीम में ये रहे शामिल
प्रक्रिया का नेतृत्व डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं सर्जरी यूनिट इंचार्ज डॉ. मनीष देवांगन ने किया। टीम में डॉ. धीरज शर्मा, डॉ. सौरभ धिवार, डीएनबी रेजिडेंट डॉ. मशूद बी., नर्सिंग स्टाफ भगवती विश्वकर्मा और एमटीए लोकेंद्र शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग का संचालन डॉ. तनुजा आनंद व डॉ. निलेश चंद्र ने किया। रेडियोलॉजी मूल्यांकन में डॉ. धीरज गुप्ता और डॉ. त्रिप्ति पारीक का योगदान रहा।
अस्पताल प्रशासन ने सराहा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. वीनीता द्विवेदी ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भिलाई व आसपास क्षेत्रों के मरीजों के लिए भरोसेमंद स्वास्थ्य (JLNHRC Laparoscopic Surgery Success) विकल्प सिद्ध होगी। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर ने बताया कि संस्थान में पहली बार इतनी उन्नत लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया की गई है।
इससे सिद्ध होता है कि अस्पताल अब जटिल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी आत्मविश्वास के साथ कर सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार ने कहा कि यह सर्जरी PMJAY के तहत निःशुल्क उपलब्ध है, जिससे गंभीर रोगी अब बिना आर्थिक भार के उन्नत शल्य चिकित्सा पा सकते हैं।
क्षेत्र के लिए राहत का संकेत
JLN चिकित्सालय की यह उपलब्धि क्षेत्र में हाई-एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की नई शुरुआत मानी जा रही है। कम रिकवरी समय, कम दर्द और कम जोखिम के कारण यह तकनीक भविष्य में कई मरीजों के लिए सहायक साबित होगी।

