वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर उथल-पुथल तेज (Iran-US Tension Oil) हो गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कूटनीतिक अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों ने नया उछाल लिया है, जिससे निवेशकों और आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है।
कीमतों में तेज उछाल, निवेशकों में घबराहट (Iran-US Tension Oil)
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत $103 प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं WTI Crude Oil भी करीब $91 के आसपास कारोबार करता नजर आया। पिछले कुछ दिनों में गिरावट के बाद आई इस तेजी ने बाजार में अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है।
ईरान के रुख ने बढ़ाया तनाव
तेल की कीमतों में इस उछाल की बड़ी वजह Iran का वह ताजा (Iran-US Tension Oil) रुख है, जिसमें उसने United States के साथ सीधे संवाद से इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भले ही कुछ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा हो, लेकिन इसे औपचारिक वार्ता नहीं माना जा सकता। पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने साफ किया कि फिलहाल सीधी बातचीत की कोई योजना नहीं है।
US अमेरिका का अलग दावा, बाजार में भ्रम
दूसरी ओर Joe Biden प्रशासन का दावा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों ने बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी निगाहें
विशेषज्ञों के अनुसार Strait of Hormuz की स्थिति भी बेहद अहम (Iran-US Tension Oil) बनी हुई है। दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। यदि यहां किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है और कीमतों में और उछाल संभव है।
आगे क्या संकेत दे रहा बाजार
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक Iran और United States के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ने की आशंका है, खासकर उन देशों में जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
