मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक कदम (Iran Saudi Tension) उठाया है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के 23वें दिन सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के कई कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है।
क्या है सऊदी का फैसला (Iran Saudi Tension)
सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि ईरान के सैन्य अटैची, उनके सहयोगी और दूतावास के अन्य कर्मचारियों को देश से निष्कासित किया जा रहा है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मामला बताया है।
क्यों उठाया गया यह कदम
सऊदी अरब का कहना है कि ईरान लगातार खाड़ी क्षेत्र में हमले (Iran Saudi Tension) कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है। विशेष रूप से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ गया है।
‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ का मतलब क्या
‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ एक कूटनीतिक शब्द है, जिसका मतलब होता है कि किसी विदेशी राजनयिक को अब उस देश में रहने की अनुमति नहीं है। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति को तय समय सीमा के भीतर देश छोड़ना अनिवार्य होता है।
कतर के बाद सऊदी का कदम
इससे पहले कतर भी ईरानी अधिकारियों को इसी तरह निष्कासित कर चुका है। अब सऊदी अरब ऐसा कदम उठाने वाला दूसरा खाड़ी देश बन गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय देशों का रुख ईरान के खिलाफ सख्त होता जा रहा है।
बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ सकता (Iran Saudi Tension) है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पहले से जारी टकराव के बीच यह कूटनीतिक कदम हालात को और जटिल बना सकता है।
सऊदी की चेतावनी
सऊदी अरब ने साफ कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा और अब किसी भी तरह के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
