IPS Demotion Cancelled: तीन पूर्व IPS अफसरों को बड़ी राहत, अब मिलेगा पुराना दर्जा

रायपुर में कैबिनेट बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी फैसले को लेकर हो रही है। लंबे समय से अटके इस मामले में सरकार के नए निर्णय ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। IPS Demotion Cancelled की खबर सामने आते ही अफसरों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं दिखने लगी हैं, कोई इसे न्याय बता रहा है तो कोई पुराने फैसलों पर सवाल उठा रहा है।

कई लोग इसे उन अफसरों के लिए बड़ी राहत मान रहे हैं जो सालों से इस फैसले का असर झेल (IPS Demotion Cancelled) रहे थे। खासकर मुकेश गुप्ता के नाम को लेकर ज्यादा चर्चा है, जिनकी स्थिति इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही थी। अब इस फैसले के बाद उन्हें भी बड़ा फायदा मिलने की बात कही जा रही है।

IPS Demotion Cancelled पर कैबिनेट का फैसला

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्ष 1988 बैच के तीन आईपीएस अधिकारियों संजय पिल्ले, आर के विज और मुकेश गुप्ता से जुड़े पुराने पदावनति आदेश को खत्म कर दिया गया। 26 सितंबर 2019 को जारी आदेश का पुनर्विलोकन करते हुए इसे निरस्त किया गया।

पुराने आदेश भी समाप्त

इसके साथ ही 24 सितंबर 2019 को लिए गए संबंधित निर्णय को भी समाप्त मानते (IPS Demotion Cancelled) हुए अपास्त किया गया है। उस समय लिए गए फैसले के आधार पर जारी सभी आदेशों को अब बैठक से पहले की स्थिति में फिर से मान्य किया जाएगा।

पिछली सरकार का फैसला

पहले की सरकार के समय इन तीनों अफसरों की पदोन्नति को निरस्त कर उन्हें डिमोट किया गया था। केंद्र सरकार से सहमति नहीं मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया था, जो उस समय काफी चर्चा में रहा था।

क्यों लेना पड़ा नया निर्णय (IPS Demotion Cancelled)

राज्य सरकार को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि पुराने दस्तावेजों में पदावनति से जुड़े आदेश पूरी तरह हट नहीं पाए थे। अब नए फैसले के बाद इन सभी रिकॉर्ड को ठीक किया जाएगा और स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

मुकेश गुप्ता को सबसे ज्यादा राहत

इस पूरे मामले में पूर्व आईपीएस Mukesh Gupta को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की बात कही जा रही है। उनके खिलाफ पहले कार्रवाई और विवाद के चलते उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

क्या मिलेगा फायदा

डिमोशन रद्द होने के बाद अब उन्हें डीजीपी स्तर का दर्जा माना (IPS Demotion Cancelled) जाएगा। इसके साथ ही पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय लाभ भी उसी आधार पर मिलेंगे।

फैसले के मायने

इस निर्णय को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल संबंधित अफसरों को राहत मिली है, बल्कि पुराने विवादित फैसलों को नए सिरे से देखने की दिशा भी साफ हुई है।

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