देश के स्वच्छतम शहर और वाटर प्लस (अपशिष्ट जल प्रबंधन) का तमगा हासिल कर चुके इंदौर में दूषित पानी पीने से एक-एक कर आठ लोगों की मौत (Indore contaminated water deaths) हो गई। यह दर्दनाक मामला भागीरथपुरा क्षेत्र का है, जहां बीते कई दिनों से रहवासी गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई होने की शिकायत कर रहे थे।
समय रहते सुनवाई न होने के कारण स्थिति बिगड़ती चली गई और सोमवार को जब 100 से अधिक लोग उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। मंगलवार तक उल्टी-दस्त से आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना ने इंदौर में पेयजल व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि लापरवाही बरतने पर जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रभारी उपयंत्री पीएचई शुभम श्रीवास्तव को सेवा से पृथक कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो जल आपूर्ति व्यवस्था में हुई चूक की विस्तृत रिपोर्ट देगी।
अधिकारियों की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में 26 दिसंबर को उल्टी-दस्त से पहली मौत (Indore contaminated water deaths)। हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद न तो जल आपूर्ति रोकी गई और न ही ठोस कदम उठाए गए।
सोमवार को अस्पताल पहुंचे करीब 100 मरीजों में से 34 की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें भर्ती करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-एक में आता है।
मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भागीरथपुरा क्षेत्र का व्यापक सर्वे किया, जिसमें सामने आया कि अधिकांश घरों में उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीज मौजूद हैं। इसके साथ ही नगर निगम की टीम ने दूषित पानी के स्रोत की जांच की।
जांच में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई कि जिस मुख्य पाइपलाइन से पूरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति होती है, उसी के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। मुख्य लाइन के फूटने के कारण ड्रेनेज सीधे उसमें मिल गया और वही गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंचता रहा। इसके अलावा क्षेत्र में कई अन्य स्थानों पर भी पेयजल वितरण लाइनों में गंभीर टूट-फूट पाई गई।
हालात को काबू में करने के लिए पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा नदी के पानी की सप्लाई फिलहाल बंद कर दी गई है और टैंकरों के माध्यम से जल वितरण किया जा रहा है।
सोमवार शाम को नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हालचाल लेते नजर आए। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए आपात सुधार कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
मृतकों के परिवारों को सहायता
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई यह घटना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों (Indore contaminated water deaths)। के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
साथ ही सभी प्रभावित मरीजों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

