प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देश को अंग्रेजी चिंतन पर आधारित मैकाले की गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने के एलान के बाद केंद्र सरकार का पूरा तंत्र सक्रिय हो गया है। शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय ने इस दिशा में तेजी से मंथन शुरू कर दिया है, और जल्द ही ऐसा व्यापक रोडमैप जारी किया जा सकता है, जो नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों, परंपराओं और जड़ों से जोड़ने के लिए निर्णायक साबित होगा। यह राष्ट्रीय अभियान (Indian Education Reform) को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के क्रियान्वयन के साथ इसकी नींव पहले ही तैयार हो चुकी है, लेकिन कई राज्यों में सुस्त गति और ढुलमुल रवैये को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब समय-सीमा तय करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में 26, 27 और 28 दिसंबर को देशभर के मुख्य सचिवों का तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में विकसित भारत, मानव पूंजी, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल शिक्षा, कृषि शिक्षा और खेल से जुड़े विषयों पर विस्तृत विमर्श होगा। यह बैठक भी (Indian Education Reform) के क्रियान्वयन को गति देने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
दिल्ली में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय ज्ञान–परंपरा को बढ़ावा देने, भारतीय खेलों को प्रोत्साहन देने, और राज्यों में क्रियान्वयन से जुड़ी संभावित बाधाओं की समीक्षा की जाएगी। शिक्षा मंत्रालय के अलावा केंद्र सरकार के कई अन्य मंत्रालय भी इसमें भाग लेंगे। अधिकारियों का कहना है कि एनईपी को लागू हुए पांच वर्ष हो चुके हैं, ऐसे में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण है कि राज्यों ने किस स्तर तक इसे अपनाया है। यदि किसी राज्य ने इसे लागू नहीं किया है तो उसके कारणों का विश्लेषण करके समाधान निकाला जाएगा। इससे स्पष्ट है कि (Indian Education Reform) के स्तर पर कोई भी देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
संस्कृति मंत्रालय भी समानांतर रूप से एक बड़े अभियान की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत देश की प्राचीन विरासत, भारतीय कला और सांस्कृतिक धरोहर को जनसरोकारों से और जोड़ने पर बल दिया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय बालवाटिका से लेकर कक्षा 8 तक की नई पुस्तकों को तैयार कर चुका है और अब 2026–27 सत्र से कक्षा 9 से 12 तक की नई पुस्तकों को लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में (Indian Education Reform) का प्रभाव स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक संरचनाओं तक व्यापक रूप से पहुंचेगा।

