Hormuz Strait Tanker Crisis : ईरान ने भारत जा रहे दो एलपीजी जहाजों को दी राहत, होर्मुज में फंसे टैंकरों के लिए खुली उम्मीद

पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत की ओर आ रहे दो एलपीजी जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय (Hormuz Strait Tanker Crisis) में आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

माना जा रहा है कि हाल के उच्चस्तरीय राजनयिक संपर्कों के बाद यह नरमी दिखाई गई है। इस फैसले से संकेत मिला है कि भारत से जुड़े ईंधन जहाजों को चरणबद्ध तरीके से रास्ता दिया जा सकता है। यह कदम केवल दो जहाजों तक सीमित राहत नहीं, बल्कि खाड़ी में रुके बाकी भारतीय टैंकरों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

होर्मुज के आसपास अब भी फंसे हैं कई भारतीय जहाज

मौजूदा स्थिति में होर्मुज के आसपास भारतीय जहाजों की बड़ी संख्या अटकी हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 28 भारतीय पोत इस पूरे समुद्री क्षेत्र में अलग-अलग हिस्सों (Hormuz Strait Tanker Crisis) में रुके हुए थे।

इनमें से एक जहाज पहले आगे बढ़ चुका है और अब दो एलपीजी जहाजों को अनुमति मिलने से बाकी जहाजों के निकलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि सभी जहाजों को एक साथ खुली छूट मिलने जैसी स्थिति अभी साफ नहीं है। फिलहाल संकेत यही हैं कि आगे बढ़ने वाले जहाजों को समन्वय और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही रास्ता दिया जाएगा।

भारत की चिंता सिर्फ जहाज नहीं, ऊर्जा सुरक्षा भी

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति को लेकर है। एलपीजी और अन्य ईंधन से जुड़े जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से घरेलू सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि भारत की ओर से कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए गए।

इस समुद्री मार्ग का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। अगर होर्मुज में रुकावट लंबी खिंचती, तो इसका असर केवल शिपिंग पर नहीं, बल्कि गैस और तेल की उपलब्धता, लागत और घरेलू बाजार पर भी पड़ता। दो जहाजों को मिली अनुमति को इसी लिहाज से एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।

पूरी तरह सामान्य नहीं हुई स्थिति

हालांकि राहत के ये संकेत उत्साह बढ़ाने वाले हैं, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। समुद्री मार्ग पर गतिविधियां अब भी सख्त निगरानी और नियंत्रित आवाजाही के बीच (Hormuz Strait Tanker Crisis) चल रही हैं। जहाजों की आवाजाही पहले जैसी सामान्य रफ्तार से शुरू नहीं हुई है और क्षेत्रीय तनाव अब भी बना हुआ है।

इसका मतलब यह है कि आगे भी किसी भी नए घटनाक्रम का असर तुरंत शिपिंग मूवमेंट पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए अभी राहत आंशिक है, पूरी नहीं। आने वाले घंटों और दिनों में यह ज्यादा साफ होगा कि बाकी जहाजों को भी इसी तरह चरणबद्ध अनुमति मिलती है या नहीं।

तेल बाजार में बनी हुई है बेचैनी

होर्मुज के आसपास तनाव और जहाजों की अटकी आवाजाही का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना (Hormuz Strait Tanker Crisis) हुआ है और बाजार हर छोटे संकेत पर प्रतिक्रिया दे रहा है।

ताजा कारोबारी सत्र में ब्रेंट 100 डॉलर के ऊपर बंद हुआ, जबकि डब्ल्यूटीआई भी मजबूत स्तर पर रहा। यह बताता है कि बाजार को अब भी सप्लाई जोखिम की चिंता है। यानी दो जहाजों को रास्ता मिलना राहत जरूर है, लेकिन निवेशक और ऊर्जा बाजार अभी इसे पूरी स्थिरता की वापसी नहीं मान रहे।

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