High Court : दुष्कर्म पीड़िता की इच्छा को मिली प्राथमिकता, अदालत ने बच्चे के भविष्य को लेकर भी दिया बड़ा निर्देश

जबलपुर में सामने आए एक संवेदनशील मामले ने कानूनी और सामाजिक हलकों में चर्चा (High Court) बढ़ा दी है। नाबालिग पीड़िता से जुड़े इस प्रकरण में अदालत के फैसले को लेकर लोगों के बीच लगातार बातचीत हो रही है। मामले की सुनवाई के दौरान जिस तरह पीड़िता और उसके परिवार की बात को गंभीरता से सुना गया, उसने पूरे घटनाक्रम को विशेष बना दिया।
अदालत में मौजूद पीड़िता ने साफ तौर पर अपनी इच्छा जाहिर की और उसके परिवार ने भी उसका साथ दिया। इसी के बाद मामले ने नया मोड़ लिया। न्यायालय ने केवल वर्तमान परिस्थिति को ही नहीं देखा, बल्कि जन्म लेने वाले बच्चे के भविष्य और उसकी आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
नाबालिग पीड़िता को बच्चे को जन्म देने की अनुमति : High Court
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्रीष्म अवकाशकालीन पीठ ने दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई एक नाबालिग पीड़िता के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति आरके वाणी की पीठ ने पीड़िता की इच्छा का सम्मान करते हुए उसे बच्चे को जन्म देने की अनुमति प्रदान की।
विशेष न्यायालय से पहुंचा था मामला
यह मामला खरगोन जिले के बालकवाड़ा थाना क्षेत्र से जुड़े एक पाक्सो प्रकरण का है। गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक हो चुकी थी और पीड़िता नाबालिग थी। इसी वजह से मंडलेश्वर स्थित विशेष पाक्सो न्यायालय ने मार्गदर्शन के लिए प्रकरण हाई कोर्ट को भेजा था।
सुनवाई में पीड़िता ने रखी अपनी बात
सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने माता पिता के साथ अदालत में उपस्थित हुई। उसने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वह गर्भपात नहीं कराना चाहती और बच्चे को जन्म देना चाहती (High Court) है। उसके माता पिता ने भी इस फैसले का समर्थन किया। इसके बाद अदालत ने गर्भसमापन से संबंधित प्रक्रिया को समाप्त करने का आदेश दिया।
चिकित्सा और पोषण की जिम्मेदारी राज्य पर
न्यायालय ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद मां और नवजात को सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही इलाज, प्रसव और पोषण से जुड़े खर्च का वहन भी राज्य सरकार करेगी।
बच्चे के 16 वर्ष तक देखभाल के निर्देश
कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि नवजात के 16 वर्ष की आयु तक उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, वस्त्र और अन्य जरूरी आवश्यकताओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अदालत ने माना कि जब पीड़िता और उसका परिवार गर्भपात नहीं चाहते, तब उनकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों ने बताया महत्वपूर्ण फैसला
इस निर्णय पर कानूनी विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आदेश पीड़िता के अधिकारों और उसकी स्वायत्तता की रक्षा करने वाला (High Court) है। साथ ही जन्म लेने वाले बच्चे के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य को भी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में यह फैसला एक अहम न्यायिक मिसाल के रूप में देखा जाएगा।



