बिलासपुर हाई कोर्ट के एक फैसले ने सरकारी विभागों में वेतन वसूली से जुड़े मामलों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों में भी इस आदेश को लेकर बातचीत तेज हो गई। अदालत ने साफ कहा कि सेवाकाल के दौरान किसी राजपत्रित अधिकारी से पुराने मामलों का हवाला देकर वेतन वसूली नहीं की जा सकती। फैसले के बाद सरकारी कर्मचारियों के बीच भी इस मामले को लेकर काफी चर्चा रही।
मामला पुलिस मुख्यालय रायपुर में पदस्थ एक डीएसपी से जुड़ा था। अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर उनके खिलाफ रिकवरी आदेश जारी किया गया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस आदेश को रद्द करते हुए सरकार को वसूली गई राशि लौटाने का निर्देश दिया है।
डीएसपी के खिलाफ जारी हुआ था रिकवरी आदेश : High Court
राजेश कुमार शर्मा पुलिस मुख्यालय रायपुर में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। उनके खिलाफ अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर रिकवरी आदेश जारी किया गया था। यह आदेश गुप्तवार्ता विभाग की ओर से जारी किया गया था। इसके बाद डीएसपी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट में दायर हुई याचिका
डीएसपी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के माध्यम से बिलासपुर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वेतन वृद्धि कार्यालय स्तर की गलती से लगी थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला (High Court) दिया गया। दलील में कहा गया कि सेवाकाल के दौरान वर्षों पुराने अधिक वेतन भुगतान के आधार पर वसूली करना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है।
24 साल पुराने मामले का जिक्र
अदालत को बताया गया कि वर्ष 2002 से अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर रिकवरी आदेश जारी किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राशि किसी धोखाधड़ी या गलत तरीके से प्राप्त नहीं की गई थी, बल्कि यह विभागीय त्रुटि की वजह से हुआ था।
प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन की बात
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि रिकवरी आदेश जारी करने से पहले अधिकारी को कारण बताओ नोटिस तक नहीं दिया गया। अदालत को बताया गया कि बिना सुनवाई का अवसर दिए सीधे वसूली आदेश जारी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
हाई कोर्ट ने रद्द किया आदेश
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने डीएसपी के खिलाफ जारी रिकवरी आदेश को रद्द (High Court) कर दिया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वसूली गई राशि तत्काल संबंधित अधिकारी के बैंक खाते में वापस जमा कराई जाए।
